जीवन कौशल प्रशिक्षण के दूसरे बैच में शामिल हुए सौ प्रतिभागी, जानेंगे WHO के 10 जीवन कौशल
गाजियाबाद। पांच दिवसीय जीवन कौशल प्रशिक्षण के दूसरे बैच का रजापुर कि ब्लाक संसाधन केंद्र पर आरम्भ किया गया। सेवारत अध्यापकों को दिए जाने वाले इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा परिभाषित 10 जीवन कौशलों को छात्रों, शिक्षकों एवं अभिभावकों के जीवन में परिलक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्रधानाचार्य एवं उप शिक्षा निदेशक जितेंद्र कुमार मलिक के निर्देशन में आयोजित इस प्रशिक्षण में वरिष्ठ प्रवक्ता व प्रशिक्षण के समन्वयक सुधीर जायसवाल व सह समन्वयक नंद किशोर ने सीखे गए कौशलों को अपने जीवन में भी उतारने का अध्यापकों से आह्वान किया। स्टेट रिसोर्स ग्रुप के सदस्या डॉ० विनीता त्यागी ने बताया कि इस प्रशिक्षण में अध्यापकों को लाइफ स्किल डेवलप करने के टिप्स दिए जाएंगे। फिजिकल और मेंटल स्किल के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए उन्होंने मेंटल स्किल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
संदर्भ दाताओं ने आत्म जागरूकता, समस्या समाधान, भावना व तनाव प्रबंधन और संप्रेषणों का सही प्रयोग करने को ही जीवन की कुशलता बताया। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के वरिष्ठ प्रवक्ता और इस प्रशिक्षण के समन्वयक सुधीर जायसवाल ने कहा कि छात्रों, अभिभावकों और अध्यापकों के जीवन में कुशलताओं को उभारने के लिए डब्ल्यूएचओ द्वारा परिभाषित जीवन के 10 कौशल अध्यापकों के साथ साझा किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों का ध्यानाकर्षण लक्ष्य की ओर कराया जाएगा।
पूर्व प्राथमिक, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के छात्रों साथ ही शिक्षकों और अभिभावकों को भी इस प्रशिक्षण का केंद्र बिंदु बनाया गया है। संदर्भ दाताओं डॉ० एम सलीम, अनीता यादव, शिववती पांडे, गीतांजलि सक्सेना, अंशुमान भारद्वाज और अमित कुमार चौधरी ने अध्यापकों को अच्छे श्रोता बनने लिखने की आदत डालने और लगातार फीडबैक देते रहने के लिए प्रेरित किया। मुझे पहचानो मैं कौन, बाल संसद, गाए गीत खुशी के और हमारे कर्तव्य और अधिकार जैसी लघु नाटिकाओं और गतिविधियों ने प्रतिभागियों का ही नहीं वरन अधिकारियों का भी मन मोह लिया।