परिषदीय स्कूलों में चेहरा पहचान प्रणाली होगी लागू, अध्यापकों को डर है कि डेटा संरक्षण कानून के अभाव में निजता का हो सकता है उल्लंघन

        लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग के हाज़िरी चेहरा पहचान प्रणाली कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में लागू की गई थी। आंकड़ों के अनुसार नवम्बर माह में यहां केवल 43 फ़ीसदी शिक्षक और 36 फ़ीसदी छात्राएं ही उपस्थित रहीं।

       चेहरा पहचान प्रणाली (FRS) किसी व्यक्ति के चेहरे का उपयोग करके उसकी पहचान करने या उसकी पहचान की पुष्टि करने का एक तरीका है। इसका उपयोग फ़ोटो, वीडियो या रीयल-टाइम में लोगों की पहचान करने के लिए किया जा सकता है।
       सरकारी प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की हाज़िरी के लिए प्रधानाध्यापकों को टैबलेट दिए जा रहे हैं। इसमें आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस युक्त कैमरे होंगे जिससे हाज़िरी होगी। इससे स्कूलों में तैनात शिक्षकों की फ़ोटो से हाज़िरी की फ़ोटो का मिलान हो जाएगा। वहीं जियो फ़ेसिंग भी इसमें की जाएगी ताकि स्कूल के बाहर से फ़ोटो इसमें अपलोड न की जा सकें।

       प्रेरणा पोर्टल पर सभी शिक्षकों व विद्यार्थियों का डाटा मौजूद है। स्कूल की शुरुआत और छुट्टी के समय फ़ोटो ली जाएगी और इससे ही शिक्षकों व विद्यार्थियों की हाज़िरी लगेगी। नवम्बर में प्रदेश के सभी केजीबीवी में इसका पायलट प्रोजेक्ट सफ़ल रहा है। प्रदेश के 746 केजीबीवी में से 663 स्कूलों का डाटा देखें तो नवम्बर में यहां 3816 शिक्षक उपस्थित रहे। वहीं 4729 शिक्षक अनुपस्थित रहे । नवम्बर में 173 शिक्षक देर से आने वाले जबकि जल्दी निकल जाने वाले 35 शिक्षक भी हैं। वहीं बच्चों की हाज़िरी देखें तो 479 केजीबीवी में 28050 छात्राएं उपस्थित रहीं जबकि यहां कुल 77030 छात्राएं पढ़ रही हैं।

FRS के बारे में शिक्षकों द्वारा व्यक्त की जा रही चिंताएं:

   सरकार इसका इस्तेमाल व्यापक निगरानी के लिए कर सकती है,

   इससे निजता का उल्लंघन हो सकता है,

   चूंकि, भारत में अभी कोई डेटा संरक्षण कानून नहीं है, अतः इसके अभाव में ड्यू प्रॉसेस (वैध प्रक्रिया) का उल्लंघन किया जा सकता है।

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