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भोजन, पकवान और परोसने की कला में निपुण हुए ढबारसी के बच्चे

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              मसूरी। आठवीं क्लास के बच्चों ने रसोई और पाकशाला के अपने हुनर से अध्यापकों और अभिभावकों को दांतो तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। गृह विज्ञान के प्रैक्टिकल में बच्चों ने विभिन्न प्रकार के लज़ीज़ व्यंजनों के माध्यम से अपने हुनर का सबूत दिया। पकवान बनाना, परोसना और उनकी आकर्षित सजावट पर अध्यापकों ने बच्चों को दिल खोलकर नंबर दिए।        ढबारसी स्थित कमपोज़िट विद्यालय में कक्षा आठ के बच्चों ने होम साइंस का प्रैक्टिकल किया। छात्राओं ने इस अवसर पर अपने बावर्ची ख़ाने और पाक कला का प्रदर्शन किया। छात्राओं ने छोले-भटूरे, गाजर का हलवा और रायता जैसे पकवान बना कर न केवल अध्यापकों बल्कि अपने अभिभावकों को भी दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। छात्राओं ने लज़ीज़ व्यंजनों के माध्यम से परीक्षक मंडल का भी मन मोह लिया। बच्चों ने ज़ायकेदार डिश तैयार करके उनको बेहतरीन अंदाज में परीक्षक मंडल के सामने परोसा। छात्रों द्वारा परोसे गए व्यंजनों की सजावट देखते ही बनती थी। एक अच्छे और सुलझे हुए कुक के साथ ही हुनरमंद बैरों की तरह से छात्...

बेसिक स्कूलों में बच्चे सीखेंगे बागवानी जुड़ेंगे परंपरागत कृषि से

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        बच्चे अब कक्षा छह से ही सिखेंगे बाग़वानी‌और आर्गेनिक खेती ● राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान को किताबें बनाने की मिल गई ज़िम्मेदारी  ● कक्षा छह से आठ तक के बच्चे होंगे कोर्स में शामिल             इलाहाबाद। सरकारी स्कूल के बच्चों को अब कक्षा छह से ही बागवानी और आर्गेनिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रदेशभर के 40 हजार से अधिक परिषदीय उच्च प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा छह से आठ तक के छात्र-छात्राओं के लिए राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान की ओर से वोकेशनल कोर्स के अंतर्गत हार्टिकल्चर और आर्गेनिक फार्मिंग में समेकित पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकें तैयार की जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी कौशल आधारित शिक्षा पर जोर दिया गया है।      राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की निदेशक डॉ. अंजना गोयल ने 14 दिसंबर को राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान के प्राचार्य अनिल भूषण चतुर्वेदी से वोकेशनल कोर्स के संबंध में रिपोर्ट मांगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि कक्षा छह से आठ तक के अधिकतर स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों ...
 ग़ाज़ियाबाद। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों ने भी शैक्षिक भ्रमण मजा लिया।

निपुण भारत बनाने को लिया नुक्कड़ नाटक का सहारा

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          गा़ज़ियाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग की महत्वाकांक्षी योजना निपुण भारत अभियान को साकार करने के लिए पांच दिवसीय नुक्कड़ नाटक श्रंखला का आरंभ ब्लॉक  रजापुर के सिकरोड़ा गांव की ग्राम चौपाल व डासना में वीर अब्दुल हमीद पार्क पर किया गया।        बेसिक शिक्षा परिषद के राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा प्रेषित श्रीमंत संस्कार संस्था टीम द्वारा इसका नेतृत्व किया गया। कार्यक्रम में खंड शिक्षा अधिकारी सर्वेश कुमार, जिला समन्वयक बालिका शिक्षा गौरव त्यागी व जिला नोडल बालिका शिक्षा पूनम शर्मा की ऊर्जावान उपस्थिति रही।  खंड शिक्षा अधिकारी सर्वेश कुमार द्वारा क्षेत्र के अनेकों गणमान्य सदस्यों की उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर कार्यक्रम का आज शुभारंभ किया गया।  खंड शिक्षा अधिकारी ने अभिभावकों व ग्राम वासियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने और अपने बच्चों के निपुण लक्ष्य प्राप्ति के हेतु शिक्षा का अधिकार प्रचार प्रसार करें और शिक्षकों को सहयोग दें। बालिका शिक्षा के जिला समन्वयक गौरव त्यागी ने बालक और बालि...

ठिठुरते हुए बच्चों के लिए स्कूल में लगाए अलाव, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष का अनोखा विरोध प्रदर्शन

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         ग़ाज़ियाबाद। जम्मू कश्मीर और हिमांचल में भारी बर्फ़बारी के बाद समूचा उत्तर भारत भीषण ठंड की चपेट में आ गया है। ऐसे में उन्हें- मुन्ने को स्कूल जाने में और कक्षा कक्षों में भी नीचे फ़र्श पर बैठने में घोर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।      हालांकि स्थानीय स्तर पर व्यवस्था करते हुए प्रदेश भर के दर्जनों जिलाधिकारियों ने अपने स्तर पर समय में बदलाव करते हुए विद्यालय संचालन के निर्धारित समय 6 घंटे से कम करके 4 से 5 घंटे कर दिया है। सीमित संसाधनों के बीच परिषदीय स्कूलों में आने वाले बच्चों के लिए सही व्यवस्था ना होने के कारण ठिठुरन भरी सर्दी में बच्चे सुबह सवेरे ही स्कूल आने के लिए मजबूर हैं। बताया गया है कि परिषदीय स्कूलों में बच्चों का समय सुबह 9:00 से 3:00 तक प्रस्तावित था। मजेदार बात यह है कि साधन विहीन सरकारी स्कूलों में बच्चों का समय जिलाधिकारी गाजियाबाद राकेश कुमार सिंह ने  भी वही 9:00 से 3:00 के बीच रखते हुए एक नया आदेश पारित किया है। शिक्षक नेताओं ने जिलाधिकारी ग़ाज़ियाबाद के इस नए आदेश पर निराशा व्यक्त की है।     ...

परिषदीय स्कूलों में चेहरा पहचान प्रणाली होगी लागू, अध्यापकों को डर है कि डेटा संरक्षण कानून के अभाव में निजता का हो सकता है उल्लंघन

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        लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग के हाज़िरी चेहरा पहचान प्रणाली कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में लागू की गई थी। आंकड़ों के अनुसार नवम्बर माह में यहां केवल 43 फ़ीसदी शिक्षक और 36 फ़ीसदी छात्राएं ही उपस्थित रहीं।        चेहरा पहचान प्रणाली (FRS) किसी व्यक्ति के चेहरे का उपयोग करके उसकी पहचान करने या उसकी पहचान की पुष्टि करने का एक तरीका है। इसका उपयोग फ़ोटो, वीडियो या रीयल-टाइम में लोगों की पहचान करने के लिए किया जा सकता है।        सरकारी प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की हाज़िरी के लिए प्रधानाध्यापकों को टैबलेट दिए जा रहे हैं। इसमें आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस युक्त कैमरे होंगे जिससे हाज़िरी होगी। इससे स्कूलों में तैनात शिक्षकों की फ़ोटो से हाज़िरी की फ़ोटो का मिलान हो जाएगा। वहीं जियो फ़ेसिंग भी इसमें की जाएगी ताकि स्कूल के बाहर से फ़ोटो इसमें अपलोड न की जा सकें।        प्रेरणा पोर्टल पर सभी शिक्षकों व विद्यार्थियों का डाटा मौजूद है। स्कूल की शुरुआत और छुट्टी के समय फ़ोटो ली जाएगी और इससे ही शिक्षकों व विद्यार्...

एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने को टीचर्स लेंगे ट्रेनिंग

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          लखनऊ। परिषदीय स्कूलों में सीबीएसई का कोर्स लागू करने से पहले शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई जा रही है।           कार्यालय सूत्रों के अनुसार बीते साल एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू करने पर कई जगह शिक्षकों को कक्षा शिक्षण में कई प्रकार की दिक्कतें हुई थीं। उसी से सबक लेते हुए इस बार प्रशिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। एससीईआरटी की निदेशक शुभा सिंह का कहना है कि नए सत्र में कक्षा तीन तक एनसीईआरटी की किताबें पूरी तरह से लागू करने की योजना है। अब कैबिनेट से प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने पर आगे की कार्यवाही शुरू होगी। फिलहाल चौथी से आठवीं कक्षा तक की किताबों की छपाई की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि कोई बड़ी अड़चन न आई तो इस बार समय से किताबें उपलब्ध करा दी जाएंगी।

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ख़त्म होगा पांच साल का इंतज़ार, परिषदीय शिक्षकों की पदोन्नति का शासन को भेजा प्रस्ताव

विशेष दिनों के प्रति जागरूक करते हुए छात्राओं को बांटे सैनिटरी पैड्स

अपराध के बढ़ते ग्राफ़ को कम करने के लिए मोहल्ले और गलियों में लगाए सीसीटीवी कैमरे