बेसिक शिक्षकों को भी मिला डॉक्टरेट, एसएसआर यूनिवर्सिटी ने राष्ट्र निर्माताओं को किया अलंकृत
नई दिल्ली। शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर बेसिक शिक्षा विभाग के इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। आज इतिहास में पहली बार बेसिक शिक्षकों को भी डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की गई।
शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र में नवाचारी और समाजोपयोगी कार्यों के एवज़ में ग़ाज़ियाबाद ज़िले के पांच शिक्षकों को यह सम्मान पाने का अवसर प्राप्त हुआ है। दिल्ली के सेंट्रल सेक्रेटेरिएट स्थित विश्व युवा केंद्र पर आयोजित एक भव्य समारोह में सोक्रेटीज़ यूनिवर्सिटी की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर डॉक्टरेट की मानद उपाधियां प्रदान की गईं। आज भारत भर के 75 संभ्रांत व्यक्तियों, बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, वकीलों, जजों समेत कई आईएएस व आईपीएस अफसरों को भी यूनिवर्सिटी की ओर से डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान करके सम्मानित किया गया। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को सोना दिलाने वाली साक्षी मलिक को भी डॉक्टरेट की उपाधि से विभूषित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी व बनारस क्षेत्र के डीआईजी सर्वेश कुमार राणा ने विश्वविद्यालय की ओर से डॉक्टरेट की मानद उपाधियां प्रदान कीं। इस अवसर पर सिने जगत की कई हस्तियों समेत भारत सरकार के कई वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारी भी मौजूद रहे। शिक्षा एवं सामाजिक फील्ड्स में बेहतर सामुदायिक समझ विकसित करने के साथ ही पत्रकारिता एवं लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए डॉ० मुहम्मद सलीम को डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की गई। डॉ० विनीता त्यागी को स्कूलों में नवाचारी विद्या के प्रसार हेतु अध्यापकों को आईडिया देने व उन्हें एक्टिव मोटिवेशन प्रदान करने के लिए, कवित्री, लॉयर एवं सफ़ल मंच संचालिका डा० पूनम शर्मा को लेखन व परामर्श के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के एवज में, डॉक्टर देवांकुर भारद्वाज को रूचिपूर्ण शिक्षा के लिए और डॉ० कविता वर्मा को स्कूल में एंगर फ्री एटमॉस्फेयर उत्पन्न करने की थीम प्रस्तुत करने के लिए एसएसआर यूनिवर्सिटी की ओर से डॉक्टरेट की उपाधि से अलंकृत किया गया। डॉक्टर पूनम शर्मा का मानना था कि प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौक़ा है जब बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापकों को डॉक्टरेट की उपाधि से अलंकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि ये ऐतिहासिक क्षण बेसिक शिक्षा विभाग के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर और एसएसआर यूनिवर्सिटी के एडवाइजर डॉक्टर पीके वर्मा ने डॉक्टरेट की उपाधि पाने वालों का आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान को पेड़ के फलों की भांति देश की जनता को अर्पित कर दें।