साहूकारों और सूदखोरों के चुंगल में फंस रही है आम जनता

        बिलासपुर। शहर में ब्याज का धंधा पहले की अपेक्षा बढ़ चुका है। सूदख़ोर लोग ज़मीन, गाड़ी और सोना आदि गिरवी रख रहे हैं साथ ही चेक के बदले ब्याज में नगद रकम देकर देश की कानून को धूल चटा रहे हैं।

         बिलासपुर रेंज के तत्कालीन आईजी पवन देव के बाद आज तक सूदखोरों के ख़िलाफ़ पुलिस अभियान छेड़ नही सकी है। फलस्वरूप अब न्यायधानी में सूदखोर बेलगाम हो चुके है।ब्याज की रकम वसूलने के लिए लोगो को धमकाया जा रहा है, यही नहीं सूदखोर इतने शातिर हो चुके है कि ब्याज में रकम लेने वाले लोगों से प्राप्त चेक को वसूली का जरिया बना लिया है। सूदखोर वसूली के लिए धारा 138 का इस्तेमाल कर रहे है और जो लोग कानून के जानकार नहीं हैं वो लोग कानून से भयभीत होकर ली गई नगद रकम के बदले सूदखोरों की मांग पर मनमाना रकम को वापस कर रहे हैं। जबकि सूद में रकम लेने वाले अगर चाहें तो भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता 154 के तहत सूदखोरों के ख़िलाफ़ अवैध वसूली 384, कर्जा एक्ट की धारा व उपधाराओं के तहत सूदखोरों के खिलाफ पुलिस अधिकारियों से लिखित में शिकायत कर अपने दस्तावेज़ (मकान, जमीन के कागज़ात, चेक, सोना व चांदी इत्यादि) सामाग्री को ज़ब्त करवा सकते हैं।

अगर आप सूदख़ोरों के चंगुल में फंस गए हैं तो घबराएं नहीं।
भारत देश के संविधान में कर्ज़ा एक्ट अवैध वसूली के प्रति विभिन्न कंडिकाओं में विभिन्न धाराएं उल्लेखित हैं। सूदखोरों के चंगुल में अगर आप फंस चुके हैं तो पुलिस से संपर्क कर तत्काल सूदखोर के ख़िलाफ़ लिखित में शिकायत करें।
        तारबाहर बिलासपुर निवासी राजेश सेठ ने तो लिंक रोड निवासी धर्मेन्द्र सिंह के चेक में 80लाख रु भरकर, चेक बाउंस का केस कर दिया, ओर सबसे बडी बात राजेश सेठ ने बैंकों से लिया गया अपना क़र्ज़ नहीं उतारा है, और धर्मेन्द्र सिंह को 80 लाख नकद उधार देना बताया, जबकि कानून के जानकार पवन गोयल ने आयकर अधिनियम की धारा 269SS के तहत आयकर विभाग को राजेश सेठ के विरुद्ध कार्यवाही करने हेतु लिखा तो राजेश सेठ भागा भागा फिर रहा है ! 
क्योंकि चेक बाउंस के केस में तो फैसला बाद में होगा लेकिन 80 लाख नकद उधार देने पर आयकर विभाग को 80 लाख का जुर्माना ज़रूर देना पड़ेगा ?

दि कोई ब्याजखोर, साहूकार आपसे कोरे चेक लेकर कुछ भी मनमानी रकम भरकर चेक बाउंस का केस आप पर करता है तो परेशान मत हो, सही वस्तुस्थिति, घटनाक्रम की आंशका ज़ाहिर करते हुऐ पुलिस को सूचना देकर पावती जरूर रखें!
यदि चेक में सभी विवरण आपके द्वारा नहीं भरा गया है, या आपके सामने नहीं भरा गया है तो भी पुलिस को की गयी शिकायत में उल्लेख ज़रूर करें।
यदि चैक बाउंस का केस करने वाला ब्याजखोर/साहूकार यह बताता है कि उन्होंने आपको चेक में उल्लेखित राशि नकद दी है तो आयकर विभाग को कार्यवाही हेतु ज़रूर लिखें !
अक्सर, ब्याज का धंधा करने वालो के कई सारे प्रकरण न्यायालय में होते है,अपने समर्थन में इन सभी प्रकरणों की नकल जरूर निकलवाये, 
ओर अंततः पुलिस को शिकायत भी करें कि कर्जा एक्ट के तहत कार्यवाही करें !  ब्याजखोरी का धन्धा करने वालों की व्यापक समस्या को देखते हुये उतर प्रदेश सरकार ने साहूकारी के लाइसेंस को नवीनीकरण करना न केवल बन्द कर दिया है बल्कि नये लाइसेंस जारी करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है

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