स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग ही हैं देश के केवटहार, भारी पड़ सकती है ज़रा-सी लापरवाही: शिक्षा उपनिदेशक

      हापुड़। टीएलएम निर्माण कार्यशाला के दूसरे दिन नोडल शिक्षक संकुलों ने एक्टिविटी बेस्ड शिक्षण को प्रेक्टिकल के माध्यम से समझा।

     वर्कशॉप में मास्क और मुखौटों की उपयोगिता पर बोलते हुए ज़िला संदर्भ दाता आरती वर्मा और नीरज खटाना ने कहा कि छोटे-छोटे रोल प्ले और बाल वाटिका की कहानी सुनाने में सकारात्मकता पैदा करने का यह एक बेहतर साधन है। संदर्भ दाताओं ने फ्लश कार्ड एक्टिविटी करा कर इनसे अनेक प्रकार के रोचक गेम्स भी बताए। 
     प्रशिक्षकों का मानना था कि इस प्रकार की एक्टिविटी से बच्चों में डिकोडिंग की समझ विकसित करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने अपने द्वारा बनाए गए भाषा बोर्ड और नंबर बोर्ड को अक्षर व अंक ज्ञान की धारणा विकसित करने का बेहतरीन माध्यम बताया। चर्चा के दौरान कहा गया कि कक्षा कक्ष में उपस्थित सभी वस्तुओं पर उनके नाम के स्टीकर लगा देने से भी प्रिंट रिच एनवायरमेंट की धारणा विकसित होगी। कहा गया कि बच्चा जब वस्तुओं और उन पर लगे हुए स्टीकर को एक साथ देखेगा तो उसे शब्द पहचानने में निश्चित रूप से आसानी होगी।
     कार्यशाला में चर्चा के दौरान अध्यापकों ने जाना कि याददाश्त का खेल, तुकान्त शब्दों की फिसल पट्टी, बूझो तो जानें, फुर-फुर (चिड़िया उड़-भैंस उड़) का खेल, ध्वनि की पहचान, सेम पिक्चर गेम, सेम पिक्चर मैचिंग गेम, टैक्टाईल (स्पर्श) बोर्ड आदि ऐसी एक्टिविटीज हैं जिन के माध्यम से बच्चे न केवल शिक्षण में रुचि लेंगे बल्कि खेल-खेल में काफ़ी कुछ सीखने का भी उन्हें अवसर प्राप्त होगा। 
     कार्यशाला का निरीक्षण करने पहुंचे शिक्षा उपनिदेशक व जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य जितेंद्र कुमार मलिक ने प्रशिक्षणार्थियों को गुरु टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग देश के केवटहार हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं दो विभागों के कंधों पर देश का भविष्य टिका हुआ है। उन्होंने अध्यापकों से कहा कि वे अपना काम पूरी तत्परता और तन्मयता के साथ करें क्योंकि ज़रा सी भी लापरवाही ख़तरनाक साबित हो सकती है। डाइट प्राचार्य ने महिला शिक्षकों का आह्वान किया कि समाज उनसे कुछ अधिक अपेक्षाएं रखता है इसलिए वो अपनी ममता, करुणा और सायकोलॉजी का भरपूर प्रयोग करें और समाज में गुरु सम्मान पर ज़रा सी भी आंच ना आने दें। उन्होंने कहा कि अध्यापन पेशे को नौकरी मानकर नहीं बल्कि समाज सेवा मान कर करें।
कार्यशाला में राजेश चौबे, रिचा सिंह, संजय कुमार, मोनिका त्यागी, मुहम्मद सलीम, गीता रानी, अलका, सारिका जैन, मंजू रावत, पूजा मलिक, ममता श्रीवास्तव, ओजस्विनी कौशल, अर्चना त्यागी, रीना चौधरी, पूजा गौतम, अनीता यादव, सबीहा सुल्तान, अंशु सिंह, रिंकी गुप्ता, अंजूसा, प्रदीप यादव, आवर्ती अग्रवाल और लक्ष्मण सिंह आदि नोडल शिक्षक संकुलों व अध्यापकों ने अपनी प्रतिभा निखारने का प्रयत्न किया।
       इस अवसर पर ग़ाज़ियाबाद नगर क्षेत्र, लोनी, रज़ापुर, मुरादनगर और भोजपुर के सभी 25 संकुल प्रभारी मौजूद रहे। 

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