सुरूचिपूर्ण वातावरण से ही ठहराव संभव है, राष्ट्र निर्माण के एक मज़बूत स्तंभ होने के नाते अध्यापक को अधिक सजग रहना होगा

        हापुड़। टीएलएम वर्कशॉप में तैयार किए गए ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षकों ने तीन दिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिन डाटा हैंडलिंग की बारीकियां जानीं। ज़िला स्तरीय संदर्भदाताओं ने "वन ऑन वन कॉरेस्पॉडेंस कार्यक्रम" के अंतर्गत वस्तुओं का मिलान करना भी सिखाया।

     ज़िला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्रवक्ताओं ने प्रतिभागी प्रशिक्षणार्थियों से कार्यशाला का फ़ीडबैक भी प्राप्त किया। कार्यशाला के अंतिम क्षणों को यादगार बनाने के लिए प्रशिक्षु अध्यापकों द्वारा मनमोहक, रंगारंग और लुभाने कार्यक्रम प्रस्तुत कर सदन का ज्ञानवर्धक मनोरंजन किया गया। 
      तीन दिवसीय टीएलएम निर्माण कार्यशाला में नोडल संकुल अध्यापकों ने निपुण भारत योजना के अंतर्गत बाल वाटिका के बच्चों के लिए टीचिंग लर्निंग मैटेरियल निर्माण के गुर सीखे। ज़िला स्तर पर इस प्रशिक्षण को प्राप्त करने के बाद मॉडल क्लस्टर टीचर्स अपने ब्लॉक के सभी प्राइमरी स्कूलों के अध्यापकों को टीचिंग लर्निंग मैटेरियल निर्माण करने के तरीके सिखाएंगे। ज़िला स्तरीय संदर्भ दाता नीरज खटाना ने आज शिक्षार्थियों को कई महत्वपूर्ण टिप्स दिए।
      उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों को डाटा हैंडलिंग का आरंभिक ज्ञान किस तरह कराया जा सकता है। छोटे बच्चों में डाटा एंट्री के लिए उन्होंने पिक्चर्स/सिंबल्स को महत्वपूर्ण बताया। वन ऑन वन कॉरेस्पोंडेंस प्रोग्राम के तहत संदर्भदाताओं नीरज खटाना और आरती वर्मा की ओर से प्रशिक्षणार्थियों को यह भी समझाया गया कि बच्चों द्वारा वस्तुओं के आपसी संबंधों की पहचान कैसे की जाए। बताया गया कि बच्चों के नामांकन के बाद उनके स्कूलों में ठहराव और शैक्षिक सम्प्राप्ति हेतु विद्यालयी वातावरण को रूचि पूर्ण बनाना होगा। छोटे बच्चों को आसान से कठिन की ओर ले जाने के लिए मूर्त से अमूर्त के सिद्धांत का पालन करना होगा।
       कार्यशाला के अंत में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी प्रशिक्षणार्थियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। कक्षा कक्षों के भीतर रूचि पूर्ण वातावरण सृजित करने के लिए छोटी-छोटी एक्टिविटीज़ की सीरीज़ भी प्रतिभागियों के समक्ष प्रस्तुत की गई। जिला संदर्भ दाता नीरज खटाना ने अपनी एक्टिविटी "लंबी दाढ़ी वाले बाबा" पर डाइट प्रवक्ताओं और प्रशिक्षकों की ख़ूब वाहवाही लूटी। अनीता यादव की प्रस्तुति "जहां पर सच्च, ईमान और सम्मान रहता है" द्वारा सदन मंत्रमुग्ध हो गया। कवयित्री और क्लस्टर टीचर अंशु सिंह ने सरकारी स्कूल के बच्चों की बदहाली "नंगे पैर छाले को छुपाता है, भूख से बेहाल- मेरे हिस्से का नौनिहाल" बयान कर के आयोजकों समेत सभी दर्शकों को आंखों में आंसू लाने पर मजबूर कर दिया। जबकि ओजस्विनी की प्रस्तुति "स्कूल चलो नारा है, पर कैसे स्कूल चलें क्या कभी विचारा है" ने अभिभावकों, बच्चों और अध्यापकों की साझी कोशिशों को अच्छे से दर्शाया।
   अंजू सैनी द्वारा प्रस्तुत "मां तुझ सा कोई और नहीं!" को भी ख़ूब सराहा गया। 

   कार्यक्रम के दौरान डायट प्रवक्ता पूनम सिंह ने भी अपने एक्सपर्ट व्यूज़ साझा किए। वरिष्ठ प्रवक्ता व प्रशिक्षण प्रभारी सचिन कसाना ने अध्यापकों का आह्वान किया कि वो पठन-पाठन की प्रक्रिया को अपने पास संजो कर रखें। उनका कहना था कि करंट अफ़ेयर और विभागीय सूचनाओं से अनभिज्ञ रहना एक राष्ट्र निर्माता के लिए घातक हो सकता है। 

   इस अवसर पर सबीहा सुल्तान, ऋचा सिंह, प्रदीप यादव, पूजा गौतम, एम०सलीम, मोनिका त्यागी, अनीता यादव, पूजा मलिक, रीनू चौधरी, गीता रानी, मंजू रावत और अंजूषा आदि ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।


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