बच्चे का चहुंमुखी विकास ही अध्यापक का परम कर्तव्य है, निपुण भारत अभियान को लक्ष्य तक पहुंचाने का संकुल शिक्षकों ने लिया प्रण
ग़ाज़ियाबाद। नाहल न्याय पंचायत के संकुलों की मासिक बैठक में छात्र उपस्थिति बढ़ाने पर अध्यापकों ने अपने आइडियाज प्रस्तुत किए। कहा गया कि प्रिंट रिच एनवायरमेंट के साथ ही स्कूल का भौतिक और शैक्षिक वातावरण भी बाल मैत्री बनाने की आवश्यकता है।
विभिन्न प्रकार के टीएलएम और लेसन प्लान्स के माध्यम से शिक्षण पर जोर दिया गया। निपुण भारत अभियान के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इन्हें फिंगर्टिप्स पर याद करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। इस अवसर पर अध्यापकों ने अपने विद्यालय को मार्च 2023 से पूर्व ही निपुण बनाने का संकल्प लिया। शिक्षकों ने स्वेच्छा से क्विज प्रतियोगिता में अधिकाधिक बच्चों की प्रतिभागिता बढ़ाने का भी प्रण लिया। इस अवसर पर क्लस्टर प्रभारियों ने आह्वान किया कि विद्यालय में मौजूद गणित किट पुस्तकालय की पुस्तकें और स्पोर्ट्स का सामान बच्चों को प्रयोगार्थ अवश्य दिया जाए। यह भी कहा गया कि टाइम एंड मोशन के अनुसार शिक्षण कार्य हेतु टाइम टेबल बनाकर उसका अनुपालन किया जाए। नई-नई शैक्षिक तकनीकी ज्ञानार्जन के लिए दीक्षा प्रशिक्षणों को पूरे मनोयोग से पूर्ण किए जाएं। बच्चों में शैक्षिक जागृति उत्पन्न करने के लिए मासिक पीटीएम में बच्चों का रिपोर्ट कार्ड भी प्रस्तुत किया जाना चाहिए। शैक्षणिक रूप से पीछे रह जाने वाले छात्रों के लिए चलाई जा रही रिमेडियल टीचिंग की प्रगति रिपोर्ट पाक्षिक रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। खंड शिक्षा अधिकारी सर्वेश कुमार के निर्देशन में शिक्षा की मशाल को आगे ले जाने का आह्वान किया गया। कहा गया कि खंड शिक्षा अधिकारी दिखावे में नहीं बल्कि भौतिक रूप से कर्मकांड पर विश्वास करते हैं। यही कारण की उनकी अपनी टीम शैक्षिक क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। संकुल बैठक का अनुश्रवण कर रही अकादमिक रिसोर्स पर्सन डॉ० रश्मि दुबे ने अध्यापकों द्वारा दिए गए प्रस्तुतीकरण पर प्रसन्नता व्यक्त की। स्टेट रिसोर्स ग्रुप की सदस्य पूनम शर्मा और विनीता त्यागी ने भी वीडियो कांफ्रेंसिंग की सहायता से बैठक की मॉनिटरिंग करते हुए शिक्षक संकुलों को आवश्यक सहयोग प्रदान किया। उन्होंने निपुण भारत अभियान के लक्ष्यों की प्राप्ति को अध्यापन का पहला कर्तव्य बताया। इस अवसर पर शिक्षक संकुल डॉ० मुहम्मद सलीम, गुरदीप सागर, डॉ० देशदीप, मुहम्मद हारुन और श्रीमती धरांशू के साथ 20 से अधिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक उपस्थित रहे।