पठन-पाठन के ख़राब स्तर से नाराज़ बेसिक शिक्षा अधिकारी ने की अध्यापकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई

        जौनपुर। एक ओर सरकारी विद्यालयों का कायाकल्प हो रहा है। वहां कांवेंट की तर्ज़ पर पढ़ाई का दावा किया जा रहा है

          लेकिन विद्यालयों में शिक्षा स्तर की सच्चाई कुछ और ही सामने आ रही है। दरअसल, बीएसए दो विद्यालय में क्लास ले रहे थे। जहां कक्षा आठ के बच्चे हिंदी नहीं पढ़ पाए। इसी तरह एक और परिषदीय विद्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान विद्यालयों में पठन-पाठन का स्तर बेहद ही ख़राब मिला।

        बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. गोरखनाथ पटेल ने बदलापुर विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय मिरशादपुर में 11:25 बजे निरीक्षण करने पहुंच गए। इस दौरान विद्यालय में नामांकित 321 छात्र संख्या के सापेक्ष 178 बच्चे उपस्थित रहे। छात्रों की उपस्थिति कम होने पर नाराज़गी जताई। विद्यालय में सफाईकर्मी के नहीं आने से काफ़ी गंदगी पाई गई। जिस पर बीएसए ने जिला पंचायत राज अधिकारी से फोन करके मामले की शिकायत दर्ज कराई। वहीं, इसी परिसर में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में निरीक्षण के दौरान अनुदेशक सुमन यादव अनुपस्थित पाई गई। कमरों में साफ-सफाई न होने से काफी गंदगी पई गई।

     ज़िला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जब कक्षा आठ के बच्चों से पढ़ाई की जानकारी ली तो वहां 80 प्रतिशत बच्चे हिंदी ही नहीं पढ़ सके। उन्होंने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए विद्यालय के प्रधानाध्यापक समेत सभी स्टाफ का जुलाई का वेतन रोकने का आदेश जारी कर दिया। विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय बड़ारी में दोपहर 12:30 बजे निरीक्षण के दौरान शिक्षामित्र शिवकुमार प्रजापति अनुपस्थित मिले। उनका आज का मानदेय कटौती कर लिया गया है। बाकी अन्य सभी स्टाफ़ मौजूद रहा। कक्षा 5 में 7 बच्चों के सापेक्ष सिर्फ़ तीन बच्चे ही हिंदी पढ़ सके। छात्रों का अधिगम स्तर काफ़ी ख़राब पाए जाने पर प्रधानाध्यापक से 2 दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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