चहक कार्यक्रम के तहत परिषदीय स्कूलों के बच्चे अब चहकते हुए नज़र आएंगे
ग़ाज़ियाबाद। परिषदीय विद्यालयों के परिसर में स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों की बालवाटिकाओं में अब न सिर्फ़ नौनिहाल चहकते नज़र आएंगे बल्कि खेल-खेल में उन्हें गणित का ज्ञान भी कराया जाएगा। इसको लेकर तीन माह का चहक कार्यक्रम आयोजित होगा। इसको लेकर यूनीसेफ़ द्वारा शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है।
शासन की ओर से जारी चहक कार्यक्रम की गाइड लाइन में बताया गया है कि तीन माह का स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम सिर्फ़ उन बच्चों के लिए तैयार किया गया है जोकि अगले साल कक्षा एक में प्रवेश पाने वाले हैं। प्रवेश से पूर्व वह इस समय आंगनबाड़ी केंद्रों की बाल वाटिका में पंजीकृत हैं। कक्षा एक के लिए उन्हें तैयार करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसमें शिक्षण सामग्री के अलावा खेल-खेल में बच्चों को प्रारंभिक साक्षरता व गणितीय बोध कराया जाएगा।जिला समन्वयक प्रशिक्षण के अनुसार यूनीसेफ के द्वारा बाल वाटिका के लिए इस बीच होने वाली गतिविधियों के लिए कार्यक्रम भी जारी कर दिया गया है, जिसमें प्रतिदिन कौन सी गतिविधियां कराई जाएंगी, इसको लेकर भी पूरे दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिले के काफ़ी विद्यालयों के परिसरों में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं उनमें बाल वाटिका कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों व शिक्षकों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इस कार्यक्रम को विधिवत शिक्षा विभाग के अधिकारियों की देखरेख में आयोजित किया जाएगा।
जिला समन्वयक प्रशिक्षण ने बताया कि बच्चों को खेल खेल में सिखाने के लिए प्रतिदिन गतिविधियों को संचालित किया जाएगा। इसमें प्रतिदिन प्रार्थना, बालगीत के अलावा अपने आस पास के जानवरों की आवाज को निकालना, मोड़-तोड़कर कागज की गेंद बनाना, हथेली से नापकर बड़ी व छोटी वस्तुओं के नाम बताना, ध्वनि पहचानना, मुक्त चित्रकारी, कहानियों के माध्यम से सीखना, मिट्टी पर आकृतियां बनाना, अंगूठे की छाप से आकृतियां बनाना आदि खेल शामिल हैं। इनकी मदद से बच्चों में सीखने की ललक के साथ गणित प्रखंड के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत पहली अप्रैल से हो चुकी है। फिलहाल स्कूलों में बच्चों का दाखिला लिया जा रहा है। खासकर प्राइमरी स्कूलों में पहली कक्षा में दाखिला लेने वाले बच्चे पहली बार स्कूली शिक्षा से जुड़ते हैं। लिहाजा इन बच्चों में स्कूल के प्रति रूझान की कमी होती है। ऐसे बच्चों को स्कूली शिक्षा से पूरी तरह जोड़ने के लिए जल्द ही सरकारी प्राइमरी स्कूलों में रेडीनेस यानी कि चहक कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। इस कार्यक्रम के तहत हर प्राइमरी स्कूल में पहली कक्षा के बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक को नोडल शिक्षक के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। प्रशिक्षित शिक्षक पहली कक्षा में नामांकित बच्चों को स्कूल की तैयारी संबंधी गतिविधियों व क्रिया कलापों का संचालन करेंगे। जिसमें बच्चे शामिल होंगे। इससे बच्चे स्कूल के प्रति तैयार हो सकेंगे और उनका जुड़ाव स्कूलों से होगा।
गतिविधियों में भाग लेने से पहली कक्षा के बच्चे स्कूल के माहौल में ढलने तथा अपने सहपाठियों से सामंजस्य बनाने में मदद मिलेगी। बच्चों को पहली कक्षा से ही गुणवत्ता शिक्षा मिलेगी तो उनका आगे काफी शैक्षणिक विकास होगा। बच्चों को भाषा व गणित विषय में रुझान बढ़ाने के लिए इस कार्यक्रम के तहत प्रयास किए जाएंगे।
बच्चों के मानसिक विकास के लिए 20 मिनट की गतिविधि होगी। इसके तहत बच्चों के वार्म अप गतिविधि के साथ ही स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाएगा। बच्चों में मानसिक व भावनात्मक विकास की गतिविधि के लिए 40 मिनट का कार्यक्रम किया जाएगा। कहानी सुनने , साझा पढ़ाई और व्यक्तिगत पढ़ाई के लिए पुस्तकालय का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए 60 मिनट तय किए गए हैं। इसके साथ ही बच्चों को गणित की उपचारात्मक शिक्षा व कौशल विकास पर भी फोकस किया जाएगा। संकुल प्रभारी मुहम्मद सलीम ने बताया कि विभागीय निर्देश मिलने पर इस कार्यक्रम को स्कूलों में चलाया जा रहा है।