शिक्षिकाओं की पीठासीन के रूप में चुनाव ड्यूटी पर भड़के शिक्षक नेता, बताया निजता का हनन

 

       ग़ाज़ियाबाद। विधानसभा चुनाव में अललटप्प ड्यूटी से शिक्षक संघ तिलमिला गया है। महिला शिक्षिकाओं की पीठासीन अधिकारी के रूप में ड्यूटी लगाए जाने से शिक्षक नेताओं में रोष है। बताया जाता है कि मतदान कर्मियों की ड्यूटी लगाते समय ना तो आयु वर्ग का ख़्याल रखा गया है और न ही वेतन ग्रेड का। मानवीय त्रुटि की हद तो यह है कि नियुक्ति और आयु में अन्यों से जूनियर महिलाओं को भी प्रीज़ाईडिंग ऑफीसर बना दिया गया है। जबकि पुरुषों और वेतनमान में अपेक्षाकृत अधिक वरिष्ठ अध्यापकों को प्रथम मतदान अधिकारी बनाया गया है। 

        उत्तर प्रदेश शिक्षक संघ की ग़ाज़ियाबाद जिला इकाई के अध्यक्ष दीपक शर्मा और कोषाध्यक्ष डॉक्टर देश दीप के साथ महानगर इकाई के अध्यक्ष अमित स्वामी और मंत्री लईक़ अहमद ने रिटर्निंग ऑफि़सर और मुख्य विकास अधिकारी को अलग-अलग ज्ञापन देकर महिला शिक्षिकाओं को पीठासीन अधिकारी की ड्यूटी से मुक्त करने की मांग की है। शिक्षक नेताओं का तर्क था कि पीठासीन अधिकारी को पोलिंग बूथ पर ही रात्रि विश्राम करना अनिवार्य होता है। उन्होंने याद दिलाया कि मतदान केंद्रों पर पुरुष कर्मियों और सिक्योरिटी पर्सनल्स के साथ रात्रि विश्राम करना महिलाओं इंडियन केवल असहज है बल्कि यह उनकी निजता का भी हनन है। ज्ञापन में कहा गया है कि रात्रि विश्राम के दौरान महिलाओं की संपूर्ण सुरक्षा भी संदेह के घेरे में रहेगी। ऐसे में शिक्षक नेताओं ने मांग की है कि समस्त महिला मतदान कर्मियों को रात्रि विश्राम से छूट प्रदान करते हुए महिलाओं को प्रीज़ाईडिंग ऑफ़िसर के स्थान पर प्रथम पोलिंग ऑफिसर नियुक्त किया जाए। इस प्रकार प्रीज़ईडिंग ऑफ़िसर के रिक्त हुए पदों पर पुरुष प्रथम मतदान अधिकारियों को वरिष्ठता के आधार पर नियुक्त किया जाए।

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