पार्टी पॉलिटिक्स से ऊपर उठकर गांव वालों ने बनाई इस्लाह कमेटी- इमामों के साथ आवश्यकतानुसार प्रशासन का भी लेंगे सहारा
हापुड़, अच्छाइयों का हुकुम देकर समाज को बुराइयों से रोकने की एक नई पहल की गई है। नशे की बढ़ती हुई लत और जिहालत को तमाम बुराइयों की जड़ बताया गया।
जनपद की तहसील धौलाना के गांव पिपलैड़ा में आयोजित बैठक में गांव वालों ने समाज को बुराइयों से रोकने का प्रण लिया। क्षेत्र के सबसे पुराने मदरसा तअ़लीमुल इस्लाम में जुटी भीड़ ने नशा, जुआ, चोरी और निरक्षरता जैसी सामाजिक बुराइयों पर गहरी चिंता व्यक्त की। सभा में वक्ताओं ने एक मत होकर नशे को सभी बुराइयों की जड़ बताया। बीड़ी- सिगरेट से लेकर अफ़ीम, गांजा और चरस जैसे तमाम तरह के नशे की बढ़ती हुई लत को समाज के लिए बेहद हानिकारक बताया गया। कहा गया कि नौजवानों से होती हुई नशे की यह लत अब किशोरों में भी आ गई है। नशा करने के लिए ही आज का युवा वर्ग जुआ-सट्टा ही नहीं बल्कि चोरी की तरफ़ भी बढ़ रहा है। कार्यक्रम के संयोजक चौधरी कामिल नंबरदार ने अनेकता में एकता न्यूज़ चैनल से बात करते हुए कहा कि पूर्व में भी गांव से अपराध ग्राफ़ को कम करने के लिए इसी प्रकार की कोशिशें की जाती रही हैं। हालांकि लोक डाउन के समय में इस संबंध में बनी कमेटी के प्रयासों को धक्का लगा था, किंतु फिर भी आपराधिक ग्राफ़ में काफ़ी कमी आई है। उन्होंने कहा कि सामाजिक भाईचारा और अमन व अमान को क़ायम रखना सभी गांव वालों का परम कर्तव्य है। कामिल का कहना था कि अभिभावकों और माता-पिता का अपने पाल्यों जीवन शैली और गतिविधियों पर संपूर्ण ध्यान ना देना ही उनको बुराइयों की दलदल में धंसा रहा है। यदि प्रत्येक माता-पिता अपने बच्चों के आने-जाने के समय और उसके साथ बैठने उठने वाले दोस्तों की निगरानी शुरू कर दे तो समय रहते वह अपने बच्चों को अपराध की दुनिया में जाने से पहले ही रोक सकते हैं। सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय सामाजिक वेलफेयर मिनिस्ट्री के पीएस टु डायरेक्टर तैयब खान ने अशिक्षा को अंधकार का कारण बताया। उन्होंने एक आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए कहा कि गांव की 1000 से अधिक बच्चे बाहर के स्कूलों में पढ़ने जाते हैं। ऐसे में यदि प्रत्येक बच्चे के अभिभावक ₹1000 माहवार भी ख़र्च करते हों तो गांव में से प्रति महीना दस लाख रुपया शिक्षा के नाम पर बाहर चला जाता है। यदि गांव वाले एकजुट हो जाएं और दो-तीन साल का पैसा एडवांस इकट्ठा कर लें तो गांव में ही बच्चों की पढ़ाई के लिए बेहतर सहूलियात फ़राहम की जा सकती हैं। सपा नेता हारून चौधरी ने अमन कमेटी के गठन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक खानदान में मोहल्ले से पांच पांच आदमियों की छोटी-छोटी कमेटी बनाकर एक बड़ी कमेटी के साथ उनकी समन्वय समिति बनाई जाए। बसपा नेता नौशाद चौधरी ने रास्तों को घेरने वालों पर आपत्ति जताते हुए इस मानसिकता को सामाजिक कलंक बताया। शिक्षा विभाग के संकुल प्रभारी डॉ० मुहम्मद सलीम ने शिक्षा और स्वच्छता पर ज़ोर देते हुए इसे कुरान व हदीस से जोड़कर दिखाया। उन्होंने कहा कि गांव के इसी मदरसे में पढ़े हुए बच्चे सरकारी अध्यापक, जज और एमबीबीएस डॉक्टर तक बने हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने बच्चों को लगन से पढ़ाएं। डॉक्टर सलीम का तर्क था कि कुरान पढ़ने वाले बच्चे दिमाग़ी तौर पर अधिक ज़हीन होते हैं। मास्टर (हाजी) फ़जर मोहम्मद ने अपने ओजस्वी भाषण से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सभा को, बसपा के विधानसभा प्रत्याशी हाजी मनसूर अली, अस्लम भाटी, प्रधान पति उम्र दराज़, नाज़िम ठेकेदार, हाजी सुलेमान, वकील सैफ़ी, इदुआ प्रधान, फुरकान, मास्टर अरशद, हसरत चौधरी आदि ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन मास्टर (हाजी) लियाकत अली ने किया।इस अवसर पर मुफ़्ती अब्दुल रहीम, मुफ़्ती मोहम्मद मूसा, हाजी ज़फ़र, एडवोकेट पप्पू चौधरी, यूनुस सैफी, महबूब अली, नदीम तैयब और रईस अहमद के साथ बड़ी संख्या में मदरसों के मौलवी और मस्जिदों के इमाम मौजूद रहे।