पत्रकार एकता के नाम पर नवोदित पत्रकारों को आगे कर क्षेत्र में एक नए पत्रकार संगठन के गठन का प्रयास

                                       मोहम्मद अहमद तेली की क़लम से

           ग़ाज़ियाबाद, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकारों के बीच ताल-मेल बनाने के बजाय दूरियां बढ़ाने का काम आजकल मुस्तैदी के साथ क्या जा रहा है। इन प्रयासों में क्षेत्र के कुछ व्यक्ति नया संगठन खड़ा करने के लिए प्रयत्नशील लोगों की पीठ पीछे से मदद कर रहे हैं। उनके इन प्रयासों में शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े एक पत्रकार मदद कर रहे हैं। सवाल यह पैदा होता है कि जिनका पत्रकारिता से कोई दूर तक नाता नहीं वह पत्रकार संगठन खड़ा करने के लिए क्यों इतने लालायित हैं? और क्षेत्र में एक नया पत्रकार संगठन खड़ा करने वालों की सपोर्ट कर रहे हैं। आख़िर लोगों का मकसद क्या है? पत्रकार संगठन खड़ा करने के नाम पर क्या कोई खेल होने जा रहा है? यह सोचने का मुकाम है। क्षेत्र के सभी सम्मानित पत्रकार बंधुओं को आत्मचिंतन करना होगा। संगठन खड़ा करने के पीछे संगठन खड़ा करने वालों का मकसद और उद्देश्य क्या है? क्या वो पत्रकारों की हकीकत में मदद करना चाहते हैं और क्षेत्र में एक नया मज़बूत पत्रकार संगठन खड़ा करने वालों का समर्थन कर रहे हैं? अथवा पत्रकारों और पत्रकार संगठन को आलाकार व्यक्तिगत लाभ उठाना चाहते हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि पत्रकारों के कंधे पर बंदूक रखकर पत्रकार संगठन के बल पर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के बीच अपनी मज़बूत पकड़ बना कर  आर्थिक अथवा राजनीतिक लाभ हासिल करना चाहते हों?
               क्षेत्र की सभी नवोदित पत्रकारों को इन सब बातों पर विचार कर पत्रकार संगठन के खड़ा करने में सहयोग करने पर और भी विचार करना होगा। अगर हक़ीक़त में ये तमाम लोग पत्रकार एकता के लिए ईमानदार और निष्पक्ष नज़र आएं तो इनका खुलकर साथ दें वरना पत्रकार संगठन खड़ा करने के प्रयासों में जुटे इन लोगों के बहकावे में आने से खुद बचे और दूसरों को भी बचाएं।
           आज की पत्रकारिता तो पहले ही नाज़ुक दौर से गुज़र रही है। पत्रकारों के मानसिक, सामाजिक, आर्थिक और शारीरिक शोषण अनवरत जारी है। इसलिए हमें बहुत सोच समझ कर इस दिशा में कदम उठाने होंगे। हमारी ज़रा सी भूल और तनिक सी लापरवाही पत्रकारों के लिए और पत्रकार जगत के लिए घाटे का सौदा साबित हो सकती है। इसलिए मेरा मानना है कि इस दिशा में पत्रकार जगत से जुड़े लोग जो भी निर्णय लें ख़ूब सोच समझकर लें ताकि बाद में पछताना न पड़े। मैं किसी संगठन अथवा व्यक्ति से निर्णायक द्वेष नहीं रखता बल्कि अनुभव के आधार पर मैं बात लिख रहा हूं कि हमें बहुत सोच समझ कर इस संगठन में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करनी है। उम्मीद है कि पत्रकारिता के क्षेत्र में आने वाले तमाम नवागंतुक पत्रकार बंधुओं के साथ साथ पहले से इस क्षेत्र में कार्यरत पत्रकार बंधु इस दिशा में सोच समझकर ही फ़सला लेंगे।

India covid cases graph

Popular News

शिक्षकों के ख़िलाफ़ जांच नहीं कर सकेंगे महानिदेशक

तरबियती कैंप में हाजियों को दिए टिप्स: हज करने का तरीक़ा और ज़रूरी सामान के साथ ही मसाइल से भी कराया रूबरू

आठवीं पास भी बन सकेंगे अग्निवीर

दिन में छह बार देनी होगी बेसिक शिक्षकों को अपनी हाज़िरी, अपलोड करना होगा सेल्फी से सुबूत

ख़त्म होगा पांच साल का इंतज़ार, परिषदीय शिक्षकों की पदोन्नति का शासन को भेजा प्रस्ताव

समस्या और तनाव प्रबंधन के गुर सीखने के बाद अध्यापक बनाएंगे आत्मजागरूक और साहसी समाज

विशेष दिनों के प्रति जागरूक करते हुए छात्राओं को बांटे सैनिटरी पैड्स