राशन का वितरण कर स्वच्छता का दिया संदेश, शिक्षा को बताया शक्तिशाली हथियार
मन्दसौर से मंगल देव राठौर (ब्यूरो चीफ़) की रिपोर्ट
कोविड लॉक डाउन से प्रभावित बच्चों को गोपाल किरन नामक समाजसेवी संस्था ने राशन किट प्रदान प्रदाय की।
शिक्षा को बताया ऐसा एक मात्र शक्तिशाली हथियार जिससे संसार को बदला जा सकता है।
"अपने शहर को ना करें मैला, साथ मैं लेकर जाये थैला" का नारा दिया।
ग्वालियर, गोपाल किरन समाजसेवी संस्था के अध्यक्ष के नेतृत्व में साउथ सेंट्रल जोन के नाइन इन माईन के जोनल कोडिनेटर निरंजन कुमार के मार्गदर्शन में बच्चों को निःशुल्क राशन किट संगीता शाक्य मुख्य संरक्षक, कैलाश चन्द मीणा,मंडल वन अधिकारी व संरक्षक के संरक्षण में PRATYeK नई दिल्ली के सहयोग से न्यू मोहन नगर, थाटीपुर, ग्वालियर मैं श्री रामप्रसाद बसेडिया (पंचायत अधिकारी,एवं संस्था मैं शासकीय योजना के विशेषज्ञ), रईस खान (मध्यराज न्यूज पेपर), श्रीप्रकाश सिंह निमराजे, जहाँआरा, सचिव की उपस्थिति मैं 35 से अधिक बच्चों को वितरित की गई। इस किट में आटा पैकेट 10 कि.ग्राम ,चावल 2 कि.ग्राम, दाल 1 कि.ग्राम, नमक, तेल 1 कि.ग्राम,चीनी 1 कि.ग्राम,हल्दी 1 पेकेट, मिर्च 1पेकेट, धनिया 1 पेकेट,चाय की पत्ती ,साबुन नहाने, कपड़े धोने, सेनेटरी पेड आदि सामान कपड़े के थैला में रखकर प्रदाान किया और सन्देश दिया किि- अपने शहर को ना करें मैला, साथ में लेकर जाये थैलाा।। लगातार शोसल मीडिया मैं विभिन्न प्रकार की गलत जानकारी देखते है, उसके फेक्ट को जानेें। भीड़ भाड़ वाले इलाके मे जाने से बचे। अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे। शिक्षा ही एक मात्र शक्तिशाली हथियार है जिससे संसार को बदला जा सकता है। कृपया बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए उनका स्कूल में प्रवेश जरूर कराएं।
बच्चों को कोरोना से बचाव को लेकर मास्क एवं सेनेटाइजर भी वितरित किया गया। हमारा उद्देश्य "अनलॉक के समय अंडर 18 उम्र के बच्चो को कोरोना जेसी बीमारियों से किस तरह सतर्कता रखनी चाहिए, मास्क एवं सेनेटाइजर वितरण के साथ किस तरह हाथों को साफ रखना जैसे समझाया एवं सिखाया जा रहा है, ताकि थर्ड स्टेज आने से बच्चो को बचाया जा सके।कुछ खास तथ्य इस दौरान आये जिनका उपयोग कर आगे बढ़ा जा सकता है।
सामाजिक रूप से आपस मे परिचित होते हुए , हमे प्राप्त योग्यता, अनुभव, संसाधन, पद, एवम पावर का उपयोग व्यक्तिगत हित के साथ साथ समाज हित में करना अनिवार्य है।
समाज की धन शक्ति, ज्ञान शक्ति, श्रम शक्ति, उपभोक्ता शक्ति, संसाधन शक्ति को आपस मे जोड़कर, समाजिक उधमशीलता, विकसित कर समाज को आत्म निर्भर बनाना अनिवार्य है। जिससे बच्चा सुरक्षित हो सके ओर उसका परिवार का बहिस्कृत न हों।हमें समाज में व्याप्त कुरीतियों, पाखंड, आडंबर, दिखावा, आदि को समाप्त कर समाज को अपनी मूलभुत आवश्यकताओं जेसे, खाना, रहना, स्वास्थ्य, और शिक्षा आदि को बेहतर बनाना है। जिसकी शुरुआत समाज के सक्षम वर्ग से होकर समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचाने की जरुरत है जिसमे बच्चों का विकास हो सके।
हमें समाज के विभिन्न लोगों को आपस मे परिचित कर, जोडकर, एक दूसरे का हाथ पकड़कर ऊपर उठाना है। हमे एक दूसरे की टांग पकड़कर नीचे नही गिराना है आपस मैं द्वेष भावना नहीं रखते हुए ,आपस मे भाईचारा कायम करना है
हम सब समाजिक ईमानदारी से समाज हित मै कार्य कर समाज को समाजिक समानता, आर्थिक विकास, बौद्धिक विकास हेतु, प्रवास कर सभी अपनी अपनीयोग्यता, संसाधनों व अनुभवों
के आधार पर योगदान दें। तभी हम बेहतर समाज का निर्माण कर भारत के विकास हो सकेगा और बच्चें को वह सब मिल सकेगा जिसकी उसको ज़रूरत है।