आदिवासियों के खेत की नपत करने और पट्टे देने के एवज़ में रेंजर ने की पैसों की मांग, हुई शिकायत
खरगोन/मध्यप्रदेश, गांव बलवाड़ा के अंतर्गत अवैध तरीके से पेड़ कटाई के बाद एक बार फिर वन मंडल बड़वाह के अधीनस्त डिप्टी रेंजर द्वारा आदिवासियों से पैसा मांगने का मामला उजागर हुआ है। इस मामले में काटकूट के अंतर्गत आने वाले ग्राम आक्या के करीब 10 से 15 रहवासियो ने डिप्टी रेंजर सेवक राम निराले पर पैसे मांगने के आरोप लगाए है। जिसकी जाच के लिए बड़वाह डीएफओ एस एस चौहान ने जाँच कर दोषियों पर कार्यवाही का ग्रामीणों को आश्वशन दिया है।
दरसल खरगोन जिले के ग्राम काटकूट के अंतर्गत आने वाले आदिवासी क्षेत्र ग्राम आक्या के आदिसवासी ग्रामीणजनो ने वन मंडल बड़वाह में डिप्टी रेंजर सेवकराम निराले द्वारा जमीन नप्ति करने एवम पट्टे बनाने के एवज में पैसे मांगने के संदर्भ में एक शिकायती आवेदन दिया था। इस शिकायती आवेदन के आधार पर ग्रामीणों ने बताया की विगत 20 वर्षो से हम अपने बाप दादाओं की जमीन पर खेती कार्य कर रहे है ।लेकिन कुछ दिनों पहले ही ग्राम ओखला रेंज के डिप्टी रेंजर निराले ने आकर हमसे हमारी जमीनों की नप्ति करने एवम उन जमीनों के पट्टे देने के नाम पर हमसे 4 - 4 हजार रुपये लिए थे ।जबकि ग्राम आक्या के रहने वाले कादर जब अपनी ही जमीन पर हल चला रहा था ।तब रेंजर निराले ने आकर उसे पकड़ा और उसे बैल सहित कादर को गाड़ी में बैठाकर ग्राम काटकूट स्थित वन मंडल कार्यालय लेकर गए ।जहा अधिकारी ने कादर को छोड़ने के लिए 15 हजार रुपये मांगे। किंतु जब कादर ने उसके पास केवल 10 हजार रुपये होने की बात कही। तो रेंजर द्वारा 10 हजार लेकर कादर और उसके बैल को छोड़ा गया ।आपको बतादे की इस शिकायत में ग्रामीणों ने बताया कि रेंजर निराले ने जिस जमीन की नप्ति के लिए हमसे पैसे लिए उस जमीन की आज तक नप्ति नही हुई ।जबकि बड़वाह वन मंडल में हमारे द्वारा रेंजर की शिकायत करने पर हमारे बयान लेने के लिए उप वन मण्डल अधिकारी विजय गुप्ता द्वारा हमे नोटिज जारी किया गया ।इस मामले में बड़वाह डीएफओ एस एस चौहान ने बताया कि हमे ग्रामीणों की शिकायत मिली है ।हम मामले की जांच कर दोषियों पर उचित कार्यवाही करेंगे। रेंजर सेवक राम निराले से जब चर्चा की तो उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया उन्होंने ग्रामीणों से राशि मांगने की बात पर साफ इंकार कर दिया ।अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या इस मामले में आदिवासी ग्रामीणों को न्याय मिलेगा या इस मामले की वरिष्ठ अधिकारी अनदेखी कर वन मंडल अधिकारी को बचाने के प्रयास करेंगे।