चुनावी परिचर्चा,पंचायत मसूरी। ग्राम पंचायतअध्यक्ष पद के लिए दर्जन भर उम्मीदवार आजमा रहे हैं किस्मत

         


                                                                    मुहम्मद अहमद तेली
            ग़ाज़ियाबाद। ग्राम पंचायत, जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के अध्यक्ष और सदस्य पद के लिए चुनाव पूरे मसूरी क्षेत्र में शबाब पर है। सभी उम्मीदवार खुद को विजयी उम्मीदवार बताने के साथ-साथ प्रचंड बहुमत के साथ जिताऊ उम्मीदवार होने का दावा भी करते घूम रहे हैं। कोई चुनावों में खानदान की दुहाई देता घूम रहा है, तो कोई चुनाव प्रचार में पैसा पानी की तरह बहा कर खुद को विजयी उम्मीदवार बताता नजर आ रहा है। कोई गांव के पिछड़ों का हमदर्द, मसीहा बताकर पिछड़ी जाति की जनता का रुख़ अपनी तरफ़ मोड़ने में जूटा है, तो वहीं दूसरी ओर निवर्तमान ग्राम प्रधान पति शकील अहमद अपने कार्यकाल के दौरान गांव में कराए गए विकास और उन्नति की कामों का वास्ता देकर जनता हुड को जिताने की बातें करता हुआ जनता में घूम रहा है। लिखने का मतलब यह है कि सभी उम्मीदवार अपने आप को विजयी बनाने के लिए रात-दिन एक किए हुए हैं।

    याद रहे कि ग्राम पंचायत मसूरी में मतदाताओं की संख्या लगभग 16,000 के आसपास है, आज ग्राम पंचायत चुनाव में चार अलग-अलग गुटों, एक दर्जन के करीब उम्मीदवार ग्राम प्रधान पद के लिए अलग-अलग अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। देखा जाए तो यहां सबसे बड़ा गुरजी खानदान कहलाता है, जिसके लगभग 18 सौ वोटर करीब हैं, 1500 की संख्या के बल पर गौडों का खानदान आता है, 12सौ वोटरों की संख्या के बल पर भन्डा खानदान आता है, चौथे नंबर पर नाली पाड़ा के लोग आते हैं जिनके लगभग 700 वोट हैं।

    बताते चलें कि अट्ठारह सौ वोट रखने वाले गुरजी खानदान से तीन उम्मीदवार अफसर, नजरियाब, और शकील मैदान में है। घर पर 15 00 वोटर रखने वाले गौड खानदान से 2 उम्मीदवार फरियाद अली और हाफिज फजलुर्रहमान चुनाव मैदान में है। तीसरे नंबर पर 1200 रखने वाले भनडा खानदान से शाहिद और नाली पाड़ा क्षेत्र से पीर अली चुनाव मैदान में डटे हुए हैं।

      सर्वेक्षण के दौरान जिस भी उम्मीदवार से बात की गई उसी ने आपको प्रचंड बहुमत के साथ जीत कर आने वाला उम्मीदवार बताया। किस उम्मीदवार ने गांव के विकास और उन्नति के लिए क्या योगदान दिया? क्या कुर्बानी दी? कितनी मेहनत की? इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है! लगभग सभी उम्मीदवार गांव के विकास उन्नति और खुशहाली के लिए आपको दूसरों से अच्छा उम्मीदवार बताने पर तुले हुए हैं! अपनी जीत को यकीनी बनाने के लिए कुछ उम्मीदवार धनबल तो कुछ उम्मीद वार चाणक्य नीति के आधार पर चुनाव जीतने की कोशिशों में जुटे हैं! अब देखना यह है कि क्षेत्र की जनता उम्मीदों पर कौन उम्मीदवार खराब उतरता है? किस उम्मीदवार के जीत का सेहरा क्षेत्र की जनता बनती है? यह आने वाला वक्त ही बताएगा!

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