मिशन हमारा अनेकता में एकता
मिशन हमारा
अनेकता में एकता
अनेकता में एकता,, परिवार एवं ए एम ई लाईव न्यूज़ चैनल ग्रुप के सभी साथियों, प्रशांशको और समूचे भारतवर्ष की जनता को हम बता देना चाहते हैं की समाचार पत्र और अपने न्यूज़ चैनल ग्रुप के सौजन्य तथा आप सभी लोगों के सहयोग से हम भारत वर्ष के अंदर एक मिशन अनेकता में एकता के नाम से शीघ्र शुरू करने जा रहे हैं, यह हमारे पिता स्वर्गीय जनाब असगर अली तेली साहब जाने-माने समाजसेवी और वरिष्ठ पत्रकार के साथ-साथ हमारी वालिदा मोहतरमा स्वर्गीय श्री शमीम बेगम का सपना था जिसे हमने पत्रकारिता के माध्यम के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से शुरू किया हुआ है, इस मिशन के शुरू करने में हमारी माता और पिता का निर्देशन हमें मिला इसके लिए हम अपने आपको खुशकिस्मत समझते हैं। इसके लिए हम ऊपर वाले के और अपने माता-पिता के आभारी हैं कि उन्होंने हमें समाज सेवा के लिए खुद को समर्पित करने के लिए प्रोत्साहित किया। वह अगर चाहते तो हमें अच्छा बिजनेसमैन और अच्छा राजनेता बना सकते थे परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया क्योंकि उनका मानना था हमारा परिवार अपने दादा परदादा ओं के कार्यकाल से ही समाज सेवा के क्षेत्र में अग्रणी रहा है, हमारे घर के दरवाजे हमेशा गरीबों, दलितों, पिछड़ों, मजलूमों और बेसहारा उनके लिए खुले रहे हैं। हमारे घर के दरवाजे पर कोई भी जरूरतमंद और पीड़ित किसी भी वक्त और किसी भी हालात में आया हमारे परिवार ने और हमारे माता-पिता ने कभी भी मुंह नहीं मोड़ा और पीड़ित की मदद के लिए उठ खड़े हुए, इसके लिए उन्होंने दिन की परवाह की रात की इतना ही नहीं उन्होंने लोगों की सेवा करने के दौरान अपने नुकसान की भी भी परवाह कभी नहीं की। अपने माता पिता की उसी सोच और नसीहत पर अमल करने के लिए हम दोनों भाई बदस्तूर अमल कर रहे हैं।
हम अपनी वाल्दा मोहतरमा को कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक करने के बाद जब आपने घर पहुंचे तब समाज के बीच यह चर्चा आम पाई गई कि अब इस घर के दरवाजे गरीबों, मजलूमों, दलितों, पिछड़ों, बेसहारों, के साथ-साथ जरूरतमंदों और यह तीनों के लिए बंद हो गए। अवाम के बीच चल रही इस चर्चा को सुनकर हमें बहुत दुख और सदमा महसूस हुआ।
परिवार के प्रति लोगों की सोच और उम्मीदों को बदलने तथा उनके अंदर जागी निराशा को आशा में बदलने के मद्देनजर हम दोनों ही भाइयों ने फैसला लिया है कि अपने परिजनों और पूर्वजों के द्वारा अपनाई गई सोच और नीतियों को बदस्तूर बरकरार रखा जाएगा। जिस प्रकार हमारा परिवार पहले से समाज के बीच उनके दुख दर्द और तकलीफ में साथ रहा है ,उसी प्रकार मुस्तकबिल बिल में भी हमारा परिवार समाज सेवा के मैदान में लगातार मौजूद रहेगा। हम बता देना चाहते हैं की अस्सी साला जिंदगी में हमारे पिता अथवा माता ने कभी भी किसी राजनीतिक दल, धार्मिक संगठन करना तो दामन थामा और ना ही किसी प्रकार से उनकी सदस्यता हासिल की, इसलिए हम अपने पूर्वजों द्वारा अपनाए गए नजरिये और समाज सेवी स्वरूप को बरकरार रखते हुए समाज सेवा के लिए 24 घंटे हर समय हर स्थिति में तैयार रहेंगे। हमारे घर के दरवाजे पहले भी 24 घंटे खुले रहते थे हमारा वादा है इंशा अल्लाह हमारी आखिरी सांस तक भी हमारे दरवाजे उसी तरह बदस्तूर खुले रहेंगे, जिस प्रकार हमारे परिजन समाज सेवा करते करते इस दुनिया से रुखसत हो गए उसी तरह हम भी समाज सेवा करते करते जिंदगी का आखरी सफर तय करना अपने खुशनसीबी समझेंगे।
अपने परिजनों द्वारा किए गए समाज सेवा के मिशन को मजबूती के साथ आगे बढ़ाने के लिए हमने अब ,
मिशन हमारा, अनेकता में एकता ,शीर्षक के तहत एक सामाजिक संगठन के अस्तित्व में लाने का मन बनाया है। साथियों हमारा यह मिशन बिना आपके सहयोग और आशीर्वाद के अधूरा है इसके लिए हमें आपका सहयोग, आशीर्वाद और समर्थन चाहिए। मिशन में शामिल होने के लिए कोई आयु, क्षेत्र भाषा और लिंग भेद का मापदंड नहीं रखा गया है, कोई भी व्यक्ति हमारे मिशन में हाथ बढ़ाने के लिए हमारे साथ जुड़ सकता है। परंतु इतना बताना हम बहुत ही जरूरी समझते हैं कि हमारे मिशन में जुड़ने के लिए खुले विचारों और खुली सोच के साथ साथ धर्मनिरपेक्ष होना जरूरी है। हमारे मिशन में शामिल होने के लिए किसी भी प्रकार की संकीर्ण मानसिकता और विचारधारा तथा स्वार्थी सोच रखने वालों को कोई स्थान नहीं है। संकीर्ण सोच और दूषित विचारधारा रखने वाला व्यक्ति भले ही वह किसी धर्म और जाति से संबंध रखता हूं हमारे साथ जुड़ने का प्रयास न करें। बाकी सभी लोगों का हमारे इस मिशन में स्वागत है इस मिशन में जुड़ने के लिए किसी भी प्रकार का कोई शुल्क आदि निर्धारित नहीं किया गया है, क्योंकि हमें सबसे ,इमानदार ,निस्वार्थ साथियों की जरूरत है।