नहीं रहे विश्वप्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हमीद अब्दुल हई, अमरीका में ली आख़िरी सांस
पटना। विश्वप्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हमीद अब्दुल हई का जन्म बिहार के पटना में एक मज़हबी घराने में हुआ था। माँ का नाम आले फ़ातिमा हई था। पिता पद्मा भूषण मुहम्मद अब्दुल हई डॉक्टर थे, प्रिंस ऑफ़ वेल्स मेडिकल कॉलेज, पटना में प्रोफ़ेसर थे।
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डॉक्टर हमीद अब्दुल हई फाइल फोटो |
स्कूल में दाख़िला लिया, मैथ और फ़िज़िक्स में अच्छी पकड़ थी, पर पिता राह चलते हुवे डॉक्टर बनने का फ़ैसला लिया। फिर प्रिंस ऑफ़ वेल्स मेडिकल कॉलेज, पटना में दाख़िला लिया और अपने भाई की तरह ही अपने क्लास में टॉप किया, ग्रेजुएशन में पटना यूनिवर्सिटी में सबसे अधिक ग्रेड लाने की वजह कर उन्हें वीलर गोल्ड मेडल से नवाज़ा गया। इसके बाद उन्होंने यहीं मेडिसींन में पोस्टग्रेजुएशन किया। और पढ़ाई मुकम्मल कर साल 1973 में आगे की पढ़ाई करने अमेरिका चले गए।
वो वहाँ के मशहूर कॉर्डीओलॉजिस्ट डॉक्टर रिचर्ड लैंगेंडॉर्फ़ और अलफ़्रेड पिक के सरपरस्ती में रह कर पढ़ना चाहते थे, जो ईसीजी एनेलेसिस के मशहूर थे, पर इन दोनो के कहने पर डॉक्टर हमीद ने हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी में दाख़िला लिया और डॉक्टर बेमार्ड लोन की सरपरस्ती हासिल की, जो उस समय दुनिया के सबसे मशहूर कॉर्डीओलॉजिस्ट थे। जिन्हें बाद में नोबल प्राइज़ भी मिला था।
डॉक्टर बेमार्ड लोन की सरपरस्ती में ट्रेनिंग हासिल करने के बाद डॉक्टर हमीद अब्दुल हई शिकागो के नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर बने। उन्होंने वहाँ 25 साल से अधिक तक अपनी सेवाएँ दी।वहाँ वो बोर्ड ऑफ़ कॉर्डीओलॉजी के सक्रिय सदस्य रहे; देखते ही देखते पूरे अमेरिका में उनकी शोहरत फैल गई, उन्हे वाइट हाउस में उस समय के राष्ट्रपति रॉनल्ड रीगन ने दावत दी।
डॉक्टर हमीद अब्दुल हई अमेरिकन कॉलेज ऑफ़ कॉर्डीओलॉजी, अमेरिकन कॉलेज ऑफ़ चेस्ट फ़िज़िशियंस, अमेरिकन कॉलेज ऑफ़ अंगीयोलोजि और अमेरिकन कॉलेज ऑफ़ नूट्रिशन के फ़ेलो तथा अमेरिकन कॉलेज ऑफ़ कॉर्डीओलॉजी के ऑर्डर ऑफ़ विल्यम हार्वी, अमेरिकन कॉलेज ऑफ़ फ़िज़िशयंस, अमेरिकन मेडिकल असोसीएशन, अमेरिकन सोसाइटी ऑफ़ इंटर्नल मेडीसीन, अमेरिकन सोसाइटी ऑफ़ कंटेम्परेरी मेडीसीन एंड सर्जरी, अमेरिकन गेरियाट्रिक सोसाइटी के सदस्य थे। इसके इलावा लंदन के रॉयल सोसाइटी ऑफ़ मैडिसीन के असोसीएट फ़ेलो भी थे। डिस्कवरी हेल्थ टीवी चैनल के हेल्थ प्रोफ़ेशन चैनल के सदस्य के साथ अमेरिकन बोर्डस ऑफ़ इंटर्नल मेडीसीन एंड कार्डीओवैस्क्युलर डिज़ीज़ के डिप्लमैट भी थे।
भारत से उनका जुड़ाव लगातार रहा, वो भारत आते रहते थे। उनका निधन शिकागो के 25 फ़रवरी 2021 को 80 साल के उम्र में हुआ। आप पटना के मशहूर सर्जन डॉक्टर अहमद अब्दुल हई के छोटे भाई थे। आपके पिता डॉक्टर मोहम्मद अब्दुल हई को भारत के राष्ट्रपति के निजी डॉक्टर भी रहे हैं, राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा उन्हें पद्मा भूषण से नवाज़ा गया था।