गणतंत्र दिवस पर विशेष
गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर समस्त भारतवासियों एवं विदेशों में जा बसे तमाम भारतवंशियों को अनेकता में एकता समाचार हिंदी समाचार पत्र, न्यूज़ चैनल ए एम ई लाईव न्यूज़ चैनल ग्रुप, आप सभी तक के साथ-सथ भारतीय मीडिया फाउंडेशन परिवार, और तेली परिवार की ओर से ढेर सारी बधाई और मुबारकबाद।
याद रहे आज ही के दिन सन 1950 में देश का संविधान लागू हुआ, संविधान के लागू होने के बाद हमें न केवल विचारों की आजादी मिली बल्कि हमें अपने अपने धार्मिक रीति-रिवाजों मान्यताओं के अनुसार अपनी जिंदगी मुंह जीने के लिए तथा रहन, सहन, खानपान, शादी विवाह का पूर्ण अधिकार भी हमें आजादी के बाद लागू होने वाले इस संविधान से मिला। मगर बदकिस्मती से आजादी के बाद लागू होने वाले इस संविधान को चंद लोगों के अलावा शक्तियों के नजर में इस संविधान के अंदर बदलाव की जरूरत महसूस होने लगी, इन्होंने जनता को संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों से देश की जनता को वंचित करने के लिए एक प्रकार से प्रयास शुरू कर दिया। इन प्रयासों के अंतर्गत संविधान को भी बंधक बनाने की नापाक साजिश है शुरू करते हुए देश की जनता को संविधान में मिले मूल अधिकारों से वंचित करने का मन में केवल बना लिया है। इनकी इच्छा है कि देश की अधिकांश जनता उनके तथा उनके आकाओं द्वारा निर्देशित दिशा निर्देशों और बनाए गए कानूनों का पालन करें, कोई भी उनकी नीति कार्यक्रमों के खिलाफ के खिलाफ आवाज नहीं उठाई और मुंह ना खोलें वह देश को जिस प्रकार चला न चाहे चलाते रहे।
मगर सौभाग्य से अपने भारतवर्ष की जनता अपने हितों के लिए पूरी तरह सजग है और इसने सरकार की दूषित मानसिकता और घटिया सोच के खिलाफ तथा इंसानियत को बचाने के लिए देशभर के राज्यों से आकर दिल्ली की सड़कों पर आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। इस आंदोलन के दौरान वह खुलकर आवाज है उठा रही है, आंदोलन कर रही है बल्कि धरने और प्रदर्शन मे बड़े पैमाने पर कर रही है। याद रहे इस धरने प्रदर्शन के द्वारा बताए गए अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए आंदोलन के दौरान 2 महीने के अंदर अनेकों अन्नदाता देश के किसान भाई अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं। मगर सरकार और सरकार में बैठे लोगों को यह सब दिखाई नहीं पड़ रहा है, और अगर दिखाएं भी पड रहा है तो इसे बदनाम करने के लिए कभी पाकिस्तानी, तो कभी खालिस्तानी और कभी विपक्षी दलों द्वारा समर्थित आंदोलन बताकर देश के अन्नदाता को कहने का मतलब है किसानों को बदनाम करने के साथ-साथ आंदोलन को खत्म करने की नाकाम कोशिश की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली की सड़कों पर बारिश, सर्द हवाओं और खुले आसमान के नीचे चल रहा देश के अन्नदाता ओं का यह आंदोलन अपने आप में एक ऐतिहासिक आंदोलन बन गया है, इस आंदोलन की शुरुआत भले ही किसानों द्वारा सरकार के कृषि कानून के विरोध को लेकर की गई हो, मगर अब यह आंदोलन किसानों को आंदोलन न रह कर के जन आंदोलन बन गया है। इस आंदोलन में किसान ही नहीं बल्कि सभी धर्म जाति संप्रदाय के साथ-साथ सभी आयु वर्ग के लोगों का साथ मिल रहा है। इतना सब कुछ दिखाई देने के बावजूद सरकार और सरकार में बैठे लोग दिल तो राष्ट्र की तरह आंखें मुझे अभी भी इस आंदोलन को नाकाम हो बनाने की साजिश रच रहे हैं। हमारा मानना है अगर सरकार सरकार में बैठे लोगों ने इस आंदोलन को हल्के में लेने का सिलसिला यूं ही जारी रखा तो सरकार का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। इस आंदोलन और किसान बिल को लेकर सरकार की स्थिति सांप और छछूंदर वाली हो गई है सांप ने छछूंदर का शिकार किया अब इस शिकार को अगर सांप ने सटका तो सांप की जीवन लीला समाप्त और अगर सांप ने पढ़ कर बाहर देखा तो की दहशत खत्म। अब देखना यह है कि सरकार ऐसी स्थिति में खुद को सुरक्षित रखने के लिए कौन से कार्ड का इस्तेमाल करती है। ज्ञात रहे इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए सरकार के द्वारा अभी तक कोई भी कोशिश कारगर साबित नहीं ओ सकी है। क्या हो रहे हैं और क्या होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।ck; padding: 1em 0; text-align: center; ">
