चोरी नहीं की तो डरना क्या?
हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के दौरान जो चुनाव परिणाम आए हैं, वह काफी चौंकाने वाले और अप्रत्याशित हैं। क्योंकि चुनाव परिणामों के आने से पहले बिहार ही नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष की जनता चुनावी वातावरण और जनमानस किस सोच के आधार पर मौजूदा सरकार के साथ साथ केंद्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार के क्रियाकलापों को देखते हुए यह मानकर चल रही थी, कि इस बार बिहार के अंदर भारतीय जनता पार्टी के समर्थित नीतीश सरकार दोबारा सत्ता में आने वाली नहीं। परंतु सामने आए मौजूदा चुनाव परिणामों ने जनमानस की इस सोच और विचारधारा पर कठोर आघात किया है l जो परिणाम सामने आए हैं वह जनमानस द्वारा किए गए मतदान के आधार पर नहीं बल्कि ईवीएम मशीन द्वारा मतगणना के आधार पर जनता के सामने प्रदर्शित किए गए हैं l बिहार की जनता ही नहीं बल्कि समूचे देश की जनता इन चुनाव परिणामों पर उंगलियां उठा रही है, सत्ताधारी दल और भारतीय जनता पार्टी को छोड़ देश के अन्य सभी राजनीतिक दल भी दल भी इन चुनाव परिणामों पर सवालिया निशान लगा रहे हैं l और इन सब का मानना है कि चुनाव परिणामों में व्यापक स्तर धांधली बाजी और घोटाला किया गया है l जनता के मतानुसार इस घोटाले में चुनाव आयोग भी बराबर का हिस्सेदार है, चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल लगातार उत्तर रहे हैं, चुनाव परिणामो ने इन चर्चाओं पर अपनी मोहर लगाने का काम किया है।
याद रहे मतदान के समय अनेक स्थानों पर धांधली बाजी पकड़े जाने के साथ-साथ मतगणना स्थल पर भी व्यापक स्तर पर धांधली बाजी की घटनाएं सामने आई थी, परंतु इन सभी घटनाओं को नजरअंदाज कर चुनाव आयोग ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार बिहार के अंदर बनाने के लिए मार्ग प्रशस्त करने का काम किया, इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता। हमारा मानना है कि यदि चुनाव आयोग की नीयत में खोट नहीं था तो बड़े पैमाने पर मतदान के दौरान होने वाली इन घटनाओं को क्यों नजरअंदाज किया? अगर हमारी यह बात गलत है, तथा जनता और अन्य तमाम राजनीतिक दलों की सोच गलत है, चुनाव आयोग को चाहिए कि जहां-जहां भी मतदान में गड़बड़ी के साथ-सथ मतगणना में विपक्षी दल तथा प्रदेश की जनता अपनी शिकायत दर्ज कराएं अथवा इस सिलसिले में अपनी आवाज उठाएं तो चुनाव आयोग को चाहिए कि तत्काल ऐसे सभी लोगों की शिकायतों का निपटारा करने की पहल करें।। हमारा भी इस संदर्भ में यही सुझाव है और मानना है कि चुनाव आयोग को अपनी निष्पक्षता और इमानदार भूमिका को साबित करने के लिए इस दिशा में रचनात्मक पहल उठानी चाहिए। क्योंकि चुनाव आयोग अपनी जगह अगर ईमानदार है और पूरी निष्पक्षता के साथ उसने अपने दायित्वों का निर्वहन किया है, तो उसे अभिलंब देश की जनता को अपने विश्वास में लेने के लिए गड़बड़ी वाले स्थानों पर पुनर्मतदान के साथ-साथ पुणे मतगणना की पहल करनी चाहिए। क्योंकि जब चोरी नहीं की तो डरना क्या?