*सीतापुर में अन्नदाताओं पर हो रहा अत्याचार किसानों को किया जा रहा आत्महत्या करने को मजबूर--
Raj gaurav Mishra
Manpur sitapur
एक ओर सरकार किसानों को धान का मूल्य 1868₹ दे रही है लेकिन क्रय केंद्रों पर किसानों को अपना ही धान बेचने के लिए युद्ध से कम संघर्ष नही करना पड़ रहा ।
क्रय केंद्र पर जब किसान जाते है तो उसे तरह -तरह के नियम और कानून बताये जाते है जिससे वह विवश होकर अपना धान 800-900 में बेचने को मजबूर हो जाता है।
अगर हमारे देश के अन्नदाताओं को इस प्रकार प्रताड़ित किया जायेगा तो आने वाले समय मे वह कैसे कृषि करेगा ।
एक ओर सरकार किसानों की आय दो गुना करने का सपना देख रही है लेकिन हमारे ज्यादातर भ्रष्ट ,लापरवाह नेताओं और अधिकारियों की वजह से किसान अपनी फसल का उचित मूल्य नही पा रहे जिसके कारण वह कर्ज में डूब जाते है और मजबूर होकर उन्हें आत्महत्या जैसी घटना को अंजाम देना पड़ता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर चीज का मूल्य उसे बनाने वाले खुद निर्धारित करते है लेकिन किसान की फसल का मूल्य वह खुद नही निर्धारित कर सकता।
ऐसे ही किसानों का शोषण होता रहा तो वह दिन भी दूर नही जब हमारा देश अनाज के लिए तरसेगा।
हमारे किसान भाई दिन - रात ,दोपहर,चिलचिलाती धूप ,गर्मी,बरसात,आंधी जैसी विपरीत परिस्थितियों को झेल कर हमारे लिए अन्न का उत्पादन करते है लेकिन फिर भी इन अन्नदाताओं पर किसी का ध्यान नहीं जाता।
इन सब समस्याओं का कारण हमारा भृष्ट सरकारी तंत्र है इन सब भृष्टाचारियो और हत्यारो पर अगर ईमानदार और जिम्मेदार नेताओं ,अधिकारियों ने अपनी दृष्टि नही डाली तो ये भृष्ट लोग हमारे देश से अन्नदाताओं का नामो निशान मिटा देंगे।