हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम अल्लाह के सच्चे बंदे और रसूल है।

ला इलाहा इलल्लाह, मुहम्मर्दु रसूल अल्लाह ,
अनुवाद, मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह एक है।
और
इस्लाम धर्म की स्थापना पैगंबर हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अल्लाह वसल्लम ने की है। याद रहे आप इस्लाम मजहब के आखिरी नबी है, इनके बाद कयामत तक कोई दूसरा नबी नही आने वाला ।
इस्लाम मजहब से पहले अरब की सर जमीन पर कबीलाई संस्कृति का बोलबाला था, और वहां रहने वाले सब लोगों ने अपने अपने अलग-अलग खुदा के बुत बना रखे थे, और सभी उनको अपने अपने हिसाब से पूजते थे। इनमें से कुछ लोग आग को पूजते थे तो कुछ लोग मूर्ति पूजा के उपासक थे। इनके अलावा यहां की सर जमीन पर यहूदी और ईसाई धर्म के मानने वाले भी बड़ी तादाद में लोग रहते थे। याद रहे उनके पूजा पाठ के तरीकों में भी काफी बदलाव आ गया था, और यह लोग भी अल्लाह को छोड़कर व्यक्ति और प्रकृति की पूजा में जुट गए थे, इतना ही नहीं इस्लाम से पहले अरब की सर जमीन पर हिंसा का बोलबाला था, औरतों को जीने का हक नहीं था, लड़कियों को पैदा होते ही जिंदा दफन कर दिया जाता था, कहने का मतलब यह है कि अरब के अंदर चारों तरफ अफरातफरी का आलम था हर कोई एक दूसरे पर बढ़ोतरी दर्ज कराने के लिए बेचैन रहता था। एक इंसान दूसरे इंसान को अपने से नीच और कमतर समझता था जाति प्रथा का बोलबाला तो नहीं था लेकिन उस से भी बदतर हालात थे, इन हालात को देखते हुए साफ कहा जा सकता है ऐसे समय में एक ऐसी शख्सियत की एक ऐसे नबी की जरूरत अरब की लोगों को थी बल्कि यूं कहिए पूरी दुनिया को थी, जो इन बदले हुए हालात को सवारने की पहल कर सके इन पत्थर के खुदाओं की पूजा करने वाले लोगों को सही और सीधे रास्ते पर लाकर एक मालिक के सामने खड़ा करने की जसारत कर सके। इसीलिए ऐसे हालात में अल्लाह ताला ने हमारे प्यारे नबी हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम की पैदाइश के लिए सर जमीन ए अरब के सबसे मजबूत और इज्जत दार माने जाने वाले हाशिम घराने  को चुना और हाशिम घराने में हजरत अब्दुल्ला , और हजरत आमना के यहां प्यारे नबी हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम की पैदाइश फरमाई।
    खुदा का फजलों करम है कि आज पूरी दुनिया में उनके बताए हुए तरीके और तालीमात  के मुताबिक जिंदगी गुजारने वाले लोग पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। और उनके बताए हुए सिद्धांतों उसूलों की पैरवी ईमानदारी और लगन के साथ कर रहे हैं।
      आज जश्ने ईद उल मिलाद उल नबी का दिन है और यह दिन मुसलमानों के ही लिए नहीं बल्कि तमाम आलम ऐ इंसानियत के लिए खुशी का दिन है क्योंकि आज ही के दिन हमारे आखरी नबी हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो वाले वसल्लम की विलादत हुई थी। साथियों हम लोग इस्लामी तालीमात से और प्यारे नबी के जरिए दिखाए गए रास्ते से भटके हुए हैं और दूसरों के नक्शे कदम पर चल कर अपनी जिंदगी गुजारने में खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। आज के दिन हम सबको मिलकर और रो-रो कर अपने गुनाहों की माफी अल्लाह से मांगने और उसके सामने गिड गिडाने  के साथ-साथ अपनी बाकी की बची जिंदगी को इस्लाम, कुरान, और प्यारे नबी हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बताए हुए रास्ते पर चलने के लिए अहद लेना होगा, कसम खानी होगी कि हम अब अपनी बाकी की जिंदगी इस्लाम के बताए हुए रास्ते पर चल कर गुजारने के साथ-साथ अपने मुल्क कौम और खानदान की खुशहाली के लिए ईमानदारी के साथ अपनी अपनी जिम्मेदारियों को निभाएंगे और जरा सी भी कोताही इस सिलसिले में नहीं बर्तगे।
  साथियों आज कुछ सिरफिरे लोग और इस्लाम विरोधी ताकतें इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करने के लिए कमर कसे हुए हैं, और पूरी दुनिया में घूम घूम कर इस्लाम और मुसलमानों को आतंकवाद का समर्थक पता कर बदनाम करने पर तुले हुए हैं। हमें इन तमाम लोगों के इस झूठ और कोशिशों को ना काम करने के लिए अपने अम्ल और व्यवहार से झूठा साबित करने के लिए मैदान में आना होगा। और अगर हमने अभी भी लापरवाही बरती और इस जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने का काम किया तो कयामत के रोज पूरी दुनिया के लोग इस गफलत के लिए हमारा दामन पकड़ लेंगे और कहेंगे कि हमने इंसानियत को जिंदा रखने और सच्चाई को दूर-दूर तक फैलाने में अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। इसलिए मेरा एक बार फिर आप सभी साथियों से निवेदन है आग्रह है कि इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ जो लोग साजिशें फैलाने में लगे हैं उनके मंसूबों को नाकाम करना है। इसी के लिए हमारे नबी हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम इस दुनिया में आए और यह जिम्मेदारी कयामत तक के लिए उम्मते मुस्लिमा के सुपुर्द कर गए कि हमें इस्लाम को दुनिया के गोसे गोसे में पहुंचाना है। इसलिए आज से सभी लोग यह तय कर ले कि हम अपनी जिंदगी इस्लाम और कुरान के साथ-साथ प्यारे नबी के जरिए बताए गए रास्ते पर गुजारने के साथ-साथ पूरी दुनिया में इस्लाम पहुंचाने का काम पूरी शिद्दत के साथ करेंगे।


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