भाजपा का बी ग्रुप है बहुजन समाज पार्टी।
भाजपा का बी ग्रुप है बहुजन समाज पार्टी।
मोहम्मद अहमद तेलीयूं तो तकरीबन सभी राजनीतिक दलों में मोहब्बत और नफरत के चलते नेताओं का आना जाना लगा ही रहता है, पहले कभी इन घटनाओं को लेकर जनता और राजनीतिक दल चिंतित हो जाते थे और बेचैनी में ऐसे हालात को कंट्रोल करने के लिए सड़कों पर दौड़ लगाते नजर आते थे वक्त के हालात के साथ साथ राजनीतिक दलों और नेताओं के व्यवहार और आचरण में भी काफी बदलाव आ गया है, किसी के दल छोड़कर चले जाने को लेकर बेचैन हो जाने वाले और दूसरे किसी दल से अपने दल में आने वालों का जिस जोर शोर के साथ पहले स्वागत समारोह आयोजित किया जाता था उसका चलन अब इतिहास के पन्नों में खो गया है। फिर भी इतना जरूर है की गलत का साथ छोड़कर चले जाने वाले सांसद और विधायकों को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता, और उनके आने जाने को लेकर जनता में चर्चाओं का बाजार गर्म हो जाता है ,जनता में कुछ लोग इसे हल्के अंदाज मैं लेते हैं। तो कुछ लोग अभी भी गंभीरता के साथ लेने के साथ-साथ राजनीतिक दल छोड़कर जाने वाले सांसद विधायकों बीच मझधार में पार्टी को छोड़कर चले जाने को गंभीरता से लेते हैं। और इनके चले जाने के कारणों की गहराई के साथ छानबीन और छोड़ी गई पार्टी तथा उसके नेतृत्व की नीतियों कार्यक्रमों में कमियां तलाशने में जुट जाते हैं। और फिर भविष्य में अपने द्वारा किए गए पहले आकलन के आधार पर ही किसी पार्टी और घोषित प्रत्याशी को समर्थन देने का मन बनाते हैं। और जिस पार्टी की नीतियां ,सिद्धांत तथा करनी और कथनी में अंतर ना होने के साथ-साथ उसके द्वारा घोषित प्रत्याशी मैं खोट ना होने के चलते उस के पक्ष में मतदान करते हैं।
हाल ही में बहुजन समाज पार्टी से निष्कासित आधा दर्जन विधायकों की गतिविधियों के साथ-साथ जब उनकी पार्टी और उनके नेतृत्व की बारीकी के साथ छानबीन का प्रयास हमारे चैनल और समाचार पत्र की टीम ने जनता और विधायकों से सीधे संपर्क कर जानकारी जुटाने का प्रयास किया तो इस दौरान कई ऐसी बातें चौंकाने वाली सामने आई जिनको ले कर उनकी बगावत में दम नजर आया, और पार्टी अपने पूर्व घोषित कार्यक्रमों और नीतियों के विरुद्ध आचरण और व्यवहार करते दिखाई पड़ी।
याद रहे बहुजन समाज पार्टी के गठन के समय पार्टी के मुखिया स्वर्गीय काशीराम जी ने सभी दलितों ,पिछड़ों, अल्पसंख्यकों के साथ साथ बहु समाज के भी दबे कुचले लोगों को साथ लेकर चलने के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं और कार्यक्रम बनाने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पार्टी से इन सभी वर्ग के लोगों को मेहनत और लगन करके जोड़ा था। लेकिन उनके स्वर्ग सिधार ने के बाद पार्टी की वर्तमान सुप्रीम कमांडर कुमारी मायावती की लापरवाही कहिए या कि निजी स्वार्थ स्वर्गीय काशीराम जी की सोच के विपरीत पार्टी को नई दिशा देने में जुट गई। इस दिशा परिवर्तन मैं उनको कुछ हद तक कामयाबी भी मिली, मगर कामयाबी से ज्यादा उन्हें और बहुजन समाज पार्टी को नुकसान का सामना करना पड़ा। और देखते ही देखते जिस तेजी और आत्मीयता के साथ देश के दलित, अल्पसंख्यक, पिछड़े, और बहुसंख्यक समुदाय के दबे कुचले लोग जुड़े थे वह सब आहिस्ता आहिस्ता उनकी नीतियों और सिद्धांतों से विमुख हो दूसरी राजनीतिक पार्टियों का दामन थामने लगे, जिसके चलते आज पार्टी के सामने अपने अस्तित्व को बचाने का संकट पैदा हो गया है। हाल की विधानसभा में 11 विधायकों पर संतोष करने वाली बसपा सुप्रीमो ने पार्टी के घटते जनाधार और लोकप्रियता को मजबूती देने के बजाय पार्टी के कर्मठ और जुझारू कार्यकर्त्ताओं का राजनीतिक और मानसिक शोषण शुरू कर दिया। और पार्टी की देखरेख एक व्यक्ति विशेष के हवाले कर पार्टी के समस्त विधायकों को उसके दिशा निर्देशों का पालन करने के लिए आदेशित कर दिया। पार्टी सुप्रीमो मायावती के द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों को कहां तक संबंधित पदाधिकारी ने निभाया इस बात को तो वह खुद और बसपा सुप्रीमो मायावती ही जान सकती हैं, मगर संबंधित व्यक्ति के आचरण और व्यवहार से पार्टी के आधा दर्जन विधायक पिछले काफी समय से नाराज चल रहे थे, जिससे पार्टी नेतृत्व भली भांति परिचित था परंतु फिर भी पार्टी सुप्रीमो मायावती ने इस और ध्यान देने के बजाय और से आंखें मूंद रखी जिसके चलते पार्टी के इन आधा दर्जन विधायकों को पार्टी हाईकमान के निर्देशों के खिलाफ बिगुल बजाने के लिए मजबूर होना पड़ा हमारे कहने का मतलब यह है की पार्टी से इन सभी विधायकों को बगावत का झंडा बुलंद करना पड़ा। पार्टी की किरकिरी होते देख पार्टी आलाकमान ने इन्हें मनाने के बजाय इन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने का काम किया जिसका असर पार्टी की छवि पर अच्छा नहीं पड़ा और लोग दबी जबान में ही नहीं बल्कि खुलकर कहने लगे हैं कि बहुजन समाज पार्टी भारतीय जनता पार्टी का बी ग्रुप है ,इसलिए पिछले ढाई सालों में पार्टी नेतृत्व ने बड़े पैमाने पर प्रदेश की जनता के सामने जन समस्याओं का अंबार और परेशानी होने के बावजूद कोई आवाज जोरदार ढंग से नहीं उठाई और नहीं कहीं पार्टी की ओर से कोई आंदोलन होता दिखाई पड़ा। जिससे साफ जाहिर होता है कि जनता की इस बात में दम है कि बहुजन समाज पार्टी भारतीय जनता पार्टी का ही भी ग्रुप है। वरना क्या कारण है कि ढाई साल के दौरान एक बार भी बहुजन समाज पार्टी नेतृत्व ने प्रदेश की सत्तारूढ़ सरकार के दोहरे चरित्र और दूषित मानसिकता के खिलाफ आवाज उठाने के लिए कोई पहल नहीं की। पार्टी से बगावत करने वाले विधायक इसी बात को लेकर आगामी विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को घेरने का इरादा किए हुए हैं। अब देखना यह है कि बहुजन समाज पार्टी अपने ऊपर लगे इन आरोपों की सफाई में जनता के सामने अपनी बात किस अंदाज में रखती है।