प्रदेश में कोरोना वायरस से ज्यादा अपराधियों का क्राइम वायरस हावी...... श्री दिनेश कसौधन (कोषाध्यक्ष ब. स. पा)  शहर दक्षिणी विधानसभा ,वाराणसी, उ.प्र 


 बहन मायावतीजी ने अपने कार्यकाल के दौरान दिखा दिया वे बहुजन समाज के लोग अच्छे शासक बन सकते है. यहां तक की आज उनके घोर विरोधी भी यह मानने लगे है की, बहन मायावतीजी का शासन सभी से अच्छा रहा. उक्त बातें " समर सलिल "पत्रिका के वाराणसी संवाददाता से अनौपचारिक वार्ता मेे साझा कि शहर दक्षिणी विधानसभा ,वाराणसी, उ.प्र के तेजतर्रार जननेता श्री दिनेश कसौधन (कोषाध्यक्ष ब. स. पा) ,


दिनेश कसौधनजी बताते है, यह बाबासाहब के कडे संघर्ष का ही फल था की बहन मायावतीजी इस देश के सबसे बड़े सुबे की पहली बार मुख्यंत्री बनी थी. बहन मायावतीजी ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में अपने सपनों को साकार करते हुए गरीबों शोषितों के लिए तमाम कल्याणकारी कार्य किये. अपने शासनकाल में बहन मायावती ने सेंट्रल गवरनमेंट की योजना डॉ. आंबेडकर ग्राम योजना को उत्तरप्रदेश में ३६ हजार दलित गावों को डॉ. आंबेडकर ग्राम नाम देकर बहोतसे विकास कार्य किये. बहन मायावतीने गरीब जनता के विकास तथा बहुजन समाज के महापुरुषों के सम्मान में कई नये जिले एवं मण्डलों का निर्माण किया. जिसके कारण जनता में कु. बहन मायावतीजी की पहचान एक सख्त एवं ईमानदार शासक के रुप में स्थापित हो गयी. बहन मायावतीजी ने अपने पहले साढ़े चार माह के शासन में ही सबसे बड़ा काम यह किया कि, जो अपराधी किसी भी सरकार में अपनी मर्जी करते थे. वे अपराधी या तो जेल में गये या प्रदेश छोड़कर भाग गये. अत्याचारी मुलायमसिंह यादव के गुण्डे, बदमाश बड़े पैमाने पर जेल भेजे गये. जो अधिकारी सरकार को अपनी मर्जी से चलाते थे वे अधिकारी बहन मायावतीजी के नाम से थर्रा कांपते थे. आई.ए.एस., आई.पी.एस., अधिकारी कभी यह सोचते नहीं थे कि उनके खिलाफ कोई कारवाई होगी. कु. बहन मायावतीजी ने बड़े पैमाने पर कामचोर अफसरों के विरुद्ध कारवाई की, जिससे पूरे कर्मचारी वर्ग में डर पैदा हो गया. डर के मारे वे गरीबों के गावों में जाकर विकास का काम देखने लगे. पुराने पट्टा धारक को, जिन्हें पट्टे की जमीन पर कब्जा नहीं दिया गया था, उन्हें अभियान चलाकर कब्जा दिलाया गया. बड़े पैमाने पर भूमिहीनों को कृषि योग्य जमीन पट्टा पर दिया गया. कु. बहन मायावतीजी के शासन में दलितों पर अत्याचार करने पर अत्याचारी को जेल जाना पड़ता था, जिससे उनके अन्दर डर पैदा हुआ. साढ़े चार माह के क्रांतिकारी कार्यों को मनुवादी पचा नहीं सके. अन्त में समर्थन वापस ले लिया. परंतु बहन मायावतीजी का जनता एवं दलितों में इतना विश्वास बन चुका था. जब १९९७ मे अगली विधानसभा के लिए पुनः चुनाव हुए तो किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. अन्त में लाचार होकर भाजपा को पुनः छः-छः माह की सरकार बनाने पर सहमत होना पड़ा. बहन मायावती जो पुनः छः माह सरकार चलाने का अवसर मिला. पुनः उन्होंने बहुजन समाज के हित में निर्णय लेना शुरू किया. बड़े पैमाने पर अपराधी पकड़े गये. तथा कामचोर अधिकारी निलंबित हुए. बहन मायावतीजी का इतना डर था कि इनकी समीक्षा बैठक के पूर्व अधिकारीयों के हाथ-पांव फूल जाते थे. लोग आशा लगाये थे कि कौन अधिकारी जाता है. जो अधिकारी बच जाते थे वे अपने देवी-देवता के दर्शन करने जाते थे. प्रशासन को चुस्त-दूरुस्त करने के लिए प्रत्येक थानों में सभी जाति के दरोगा एवं सिपाहिओं की नियुक्ति की गयी ताकि गरीब जनता की बात सुनी जा सके. 


कसौधन जी ने बलिया में हुए पत्रकार की हत्या पर दुख जताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे यूपी में हत्या और महिला असुरक्षा 


सहित जिस प्रकार से गंभीर अपराधों की बाढ़ लगातार जारी है, उससे स्पष्ट है कि यहां कानून का नहीं बल्कि जंगलराज चल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोरोना वायरस से ज्यादा अपराधियों का क्राइम वायरस हावी है। जनता त्रस्त है। सरकार इस ओर ध्यान दे -


जमील अख्तर संवाददाता वाराणसी


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