*पितरों का खाय नहाय दो सितंबर से आरम्भ*

 


ज्ञानपुर/लालानगर,भदोही:-भारत देश मे आदिकाल से चली आ रही पितरो के प्रति इस परम्परा को आज भी लोग बड़ी ही निष्ठा के साथ निभाते चले आ रहे हैं बता दें कि हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से लेकर अश्विन मास की अमावस्या तक पितृ तर्पण किया जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इन पन्द्रह दिनों में अपने पितरों की मृत्यु तिथि के मुताबिक तर्पण करता है उसे पितरों का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे व्यक्ति से उसके पितृ प्रसन्न‌ होकर उसके जीवन की सभी अड़चनों को दूर करते हैं और इसके साथ हिन्दू धर्म में मान्यता है कि साल में एक बार आत्माओं के स्वामी श्री यमराज सभी आत्माओं को पृथ्वी लोक पर भेजते हैं। यह सभी आत्माएं अपने परिवारजनों से अपने हेतु तर्पण लेने के लिए धरती पर आती हैं ऐसे में जो व्यक्ति अपने पितरों का श्रद्धा से तर्पण नहीं करता है उसके पितृ उससे नाराज हो जाते हैं। इसलिए पितृ पक्ष के दौरान पितृ तर्पण जरूरत करना चाहिए। 


वहीं दूसरी ओर पितृ पक्ष के आखिरी दिन पितरो के वास्ते भलि भाती पूजा पाठ किया जाता हैं जिसमें खोया, जौ का आटा, तिल, सहद, कुसा सहित विभिन्न सामानों को मिलाकर और उसके छोटे छोटे गोली बनाकर गंगा में प्रवाहित करते हैं जिससे ये सब करने से पितृ प्रसन्न होते हैं|


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