महामारी के दौरान परीक्षा आयोजित करने से छात्रों और उनके परिवारों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा... छात्रनेता - अभिषेक सोनकर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ "उपाध्यक्ष "प्रत्याशी
महामारी के दौरान परीक्षा आयोजित करने से छात्रों और उनके परिवारों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा। करीब 16 लाख और 10 लाख छात्रों ने नीट और जेईई के लिए अपना पंजीकरण कराया है। अप्रैल में कोरोना संक्रमितों की संख्या कम थी, जबकि अब रोज़ बड़ी तादाद में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। सरकार ने स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का हवाला देते हुए जुलाई में होने वाली परीक्षाओं को महामारी के कारण बिगड़ते हालात को देखते हुए स्थगित कर दी गई थी।
परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की संख्या अधिक है, जबकि परीक्षा केन्द्रों की संख्या कम है। ऐसे में छात्रों के बीच शारीरिक दूरी बनाये रखना मुश्किल होगा।
बिहार और असम के बाढ़ प्रभावित राज्यों में रहने वाले छात्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचना बेहद मुश्किल होगा। यह भी कहा जा रहा है कि महामारी के कारण अधिकतर छात्र अपने गृहनगर जा चुके हैं। ट्रेन, सड़क और हवाई यात्रा में कई तरह की पाबंदियां लगी हुईं हैं, ऐसे में छात्रों को परीक्षा के लिए यात्रा करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने देश छोड़ चुके छात्रों के लिए विदेशों में परीक्षा केंद्र की मांग करने वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया है। हालांकि जेईई परीक्षा के केन्द्र विदेशों में भी बनाये गए हैं, जिन छात्रों को नीट की परीक्षा में शामिल होना है उन्हें भारत आना होगा।
जेईई परीक्षा 1 से 6 सितंबर के बीच आयोजित की जाएगी, जबकि नीट 13/14 सितंबर को आयोजित की जाएगी। विदेशों से लौटने वाले लोगों पर क्वारंटाइन नियम लागू होते हैं। ऐसी स्थिति में छात्रों के लिए महामारी के दौरान परीक्षा आयोजित करने से छात्रों और उनके परिवारों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा। करीब 16 लाख और 10 लाख छात्रों ने नीट और जेईई के लिए अपना पंजीकरण कराया है।कोरोना के बढ़ते संक्रमण के माहौल में नीट, जेईई परीक्षा देने जाने वाले छात्र-छात्राओं व उनके अभिवावकों की बात सुनना जरूरी है। ये बच्चे देश के भविष्य हैं। छात्र-छात्राओं की चिंताओं को संवेदना से देखना होगा न कि हठ और राजनीतिक दृष्टि से।
जमील अख्तर-वाराणसी संवाददाता