*जनपद शाहजहांपुर के इन गांवों में आतंक मचा रहे भालू व बाघ, प्रशासन ने संभाला मोर्चा*


आबादी के बीच बाघ और भालू पहुंच रहे है। पिता-पुत्र को भी घायल कर चुके है। लेकिन वन विभाग की टीम इन्हें पकड़ना तो दूर उनकी गतिविधियों पर भी नजर नहीं रख पा रहा है। 


 


शाहजहांपुर, आबादी के बीच बाघ और भालू पहुंच रहे है। पिता-पुत्र को भी घायल कर चुके है। लेकिन वन विभाग की टीम इन्हें पकड़ना तो दूर उनकी गतिविधियों पर भी नजर नहीं रख पा रहा है। ऐसे में प्रशासनिक व पुलिस विभाग के अधिकारियों ने मोर्चा संभाल लिया है। एसडीएम दशरथ कुमार व सीओ नवनीत कुमार नायक पुलिस टीम के साथ शनिवार को ऐसे गांवों में पहुंचे जहां बाघ और भालू की दहशत ज्यादा है। दोनों अधिकारी सबसे पहले बुझिया गांव पहुंचे। जहां झोपड़ी में सो रहे पिता-पुत्र को भालू ने घायल कर दिया था। उनके परिजनों ने जानकारी लेने के बाद अन्य ग्रामीणों से भी बात की। एसडीएम ने बताया कि इन पशुओं से बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। यदि खेतों में जाये तो पांच से छह ग्रामीण एक साथ जाए।


 


सीओ ने दी हिदायत बुझिया गांव में जब एसडीएम व सीओ पहुंचे तो ग्रामीणों ने वन विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही भी बताना शुरू कर दी। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के स्थानीय अधिकारी फोन नहीं रिसीव करते है। इसके अलावा क्षेत्र में कांबिंग बढ़ाने की भी अपील की। जिसके बाद सीओ ने वन दारोगा से नाराजगी जताई। कहा ग्रामीणों के संपर्क में रहे। यदि आबादी तक जंगली पशु पहुंच रहे है तो यह गंभीर है।


 


बढ़ाई गई कैमरों की संख्या लोहंगापुर गांव के पास एक सप्ताह पहले बाघ देखे जाने के बाद वन विभाग की ओर से पांच इंफ्रारेड कैमरे लगवाए गए थे। लेकिन उनमे एक बार भी जंगली पशु की गतिविधि नहीं कैद हुई। इसके बाद जंगल के किनारे पुनौती, सरैया, बिलंदापुर, भरकलीगंज आदि गांवों के किनारे 13 और कैमरे लगाकर निगरानी करना शुरू कर दी है।


 


14 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जो प्रतिदिन जंगल के आस-पास के क्षेत्र में पहुंचकर ग्रामीणों को भी जागरूक कर रही है। खुद भी इसकी लगातार मॉनीटरिंग कर रहे है। आदर्श कुमार, डीएफओ


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