*जनपद शाहजहांपुर बिकरु कांड के बाद नहीं दिख रहा खौफ, शाहजहांपुर में हो रहे पुलिस पर हमले*
कानपुर के बिकरु कांड के बाद से यूपी पुलिस की जहां जमकर किरकिरी हुई। वहीं अभी भी सख्त कार्रवाई न होने से हमलावरों के हौसले बुलंद नजर आते है।
शाहजहांपुर, कानपुर के बिकरु कांड के बाद से यूपी पुलिस की जहां जमकर किरकिरी हुई। वहीं अभी भी सख्त कार्रवाई न होने से हमलावरों के हौसले बुलंद नजर आते है। शाहजहांपुर में पुलिस टीम पर पहले भी हमले हो चुके है, लेकिन हमलावरों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई। जिस खुटार, पुवायां, गढ़िया रंगीन समेत कई थाना क्षेत्रों में हुई इस तरह की घटनाओं में सिर्फ नामजद पर ही कार्रवाई की गई। जबकि अज्ञात में दर्ज मुकदमों में पुलिस सिर्फ लोगों को पूछताछ तक थाने लाकर छोड़ देती है। विभाग की किरकिरी से बचाने के लिए अधिकारी हमले से इन्कार करते हैं।
पुलिस पर हुए हमलों पर एक नजर
26 अगस्त को रोजा थाना क्षेत्र में दो पक्षों में फायरिंग हो गई थी। सूचना पर जब पुलिस मौके पर पहुंची तो उन्हें भी हमलावरों ने दौड़ा लिया था। पुलिस टीम पर हुए हमले- छह मई गढ़िया रंगीन थाना क्षेत्र में उमरसड़िया गांव में गोकशी की सूचना पर पहुंची पुलिस टीम पर अपराधियों ने हमला कर दिया था। जिसमे चार पुलिसकर्मी समेत कई ग्रामीण भी घायल हो गए थे।
04 जुलाई को खुटार थाना क्षेत्र के मैनिया गांव में पुलिस टीम शराब माफिया को पकड़ने गई थी। जहां ग्रामीणों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया था। जिसमे दारोगा समेत तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसके अलावा सरकारी जीप पर भी तोड़फोड़ की गई थी।
06 जुलाई को पुवायां क्षेत्र के नत्थापुर गांव में ट्रांसफार्मर से बिजली लाइन जोड़ने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया था। पुलिस टीम जब समझाने गई तो उस पर ग्रामीण हमलावर हो गए थे।
02 अगस्त सिंधौली थाना क्षेत्र के रक्शा गांव में चाट विक्रेता के रुपये न देने पर विवाद हो गया था। डायल 112 मौके पर पहुंची तो दो सिपाहियों के साथ मारपीट हुई थी। जिसमे सिपाही की वर्दी भी फाड़ दी थी।
26 अगस्त रोजा थाना क्षेत्र के बरनई गांव में दो पक्षों में विवाद के बाद फायरिंग हुई थी। पुलिस टीम जब मौके पर पहुंची तो उसे भी हमलावरों ने दौड़ा लिया था।