*नामी-बेनामी जमीन कब्जाने बाले भू-माफ़ियायों के साथ मिलकर राजस्व अधिकारी सरकार को पहुंचा रहे जमीनी क्षति* 

 *परबेज खान की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश मंडल सहायक* 


पीलीभीत। यूं तो जनपद के हरेक कोने में लोक संपत्ति पर भू-माफियाओं का अबैध कब्जा है। शहर से लेकर देहात क्षेत्रों में भू-माफियाओं को लोक संपत्तियों पर अबैध कब्जे कराकर चुनिंदा लेखपाल करोड़ों – अरबों की अबैध संपत्ति के स्वामी बन चुके हैं। जनपद की अमरिया तहसील क्षेत्र में हरदासपुर , क्योलारा , बिरहनी , भगतनिया , मझारा , जगत , रसूला , खली नवादा और सूरजपुर सहित कई अन्य गाँव में बड़े-बड़े सिख फार्मर हैं। सूत्रों की माने तो कुछ चुनिंदा लेखपालों के बीच इन राजस्व ग्रामों को आवंटित कराने के लिए बोली लगाई जाती है। आपको यह पढ़कर आश्चर्य होगा कि आखिर इन ग्रामों में ऐसा क्या है , जिसके लिए लेखपाल बोली लगाते हैं। जी हां तो हम आपको बता दें कि यहां के बड़े-बड़े सिख फार्मर सरकारी संपत्तियों पर अबैध कब्जा करने सहित सीलिंग एक्ट की कार्यवाही से बचने के लिए अपने जीवित बुजुर्गों को मृत दर्शाकर लेखपाल के माध्यम से जमीनों की फर्जी विरासत दर्ज कराने , विदेशी लोगों के नाम की बेनामी जमीन पर अबैध कब्जा करने जैसे गोरखधंधे करते रहते हैं , जिसमे सरकार को क्षति पहुंचाने बाले ऐसे भू-माफिया फार्मरों का सहयोग करके और उनके गलत कारनामों पर पर्दा डालकर लेखपाल चांदी काट रहे हैं। चुनिंदा लेखपाल एक ही क्षेत्र में दस-दस बर्षों से तैनात हैं और सरकारी संपत्तियों और सरकार का अहित करके अमरिया और पीलीभीत के कई ऐसे लेखपाल जिनकी पुश्तैनी हैसियत शून्य थी , आज पीसीएस और आईएएस अधिकारियों को मात दे रहे हैं।
इसी क्रम में हल्का लेखपाल राम बहादुर की सरपरस्ती में तहसील अमरिया क्षेत्र के गाँव रसूला निवासी दलवीर सिंह उर्फ लोटा सिंह एवं हरजीत सिंह आदि बर्षों से सैकड़ों एकड़ नामी-बेनामी कृषि भूमि पर काबिज होकर फसलों की पैदावार कर रहे हैं। विदेशी नागरिकता प्राप्त लोगों की जमीन को राज्य सरकार में निहित कराने की कार्यवाही करने की बजाय लेखपाल द्वारा निज स्वार्थ सिद्ध किया जाता रहा है। हद उस बक्त हो गई जब जिलाधिकारी के आदेश का हवाला देकर अमरिया तहसीलदार व थाना पुलिस ने मिलकर सैकड़ों एकड़ और नामी-बेनामी जमीन पर हरजीत सिंह व दलवीर सिंह का अनाधिकृत कब्जा करा दिया।



बतातें चलें कि ग्राम खली नवादा में बर्ष 2002 के आसपास चकबंदी हुई थी।चकबंदी के दौरान सभी किसानों की जमीनों का सीमांकन अथवा चिन्हीकरण किया गया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक ग्राम सूरजपुर निवासी मंजीत सिंह , काले सिंह आदि लोग विगत बर्षों से धान , गेहूं , गन्ना आदि की फसल करते चले आ रहे थे। मंजीत सिंह ने अपने कब्जे बाली जमीन पर विभिन्न प्रजातियों के बृक्षों से बाग भी लगाया था। अचानक इस जमीन पर गाँव रसूला निवासी दलवीर सिंह उर्फ लोटा सिंह एवं हरजीत सिंह की नज़र पड़ी और फिर क्या था , एक एप्लिकेशन पर एक ही दिन में डीएम , एसडीएम और तहसीलदार तक ने मोर्चा संभाल लिया। दबंगई और गुंडई के कारण सुर्खिया बटोरने बाले चर्चित तहसीलदार शेरबहादुर सिंह थाना अमरिया पुलिस बल के साथ हरजीत सिंह और दलवीर को कब्जा दिलाने मौके पर पहुंच गए , जबकि हरजीत सिंह एवं दलवीर सिंह पूर्व से ही सैकड़ों एकड़ नामी-बेनामी जमीन जोत रहे थे। आरोप है कि मौके पर पहुंचते ही तहसीलदार शेरबहादुर सिंह ने मंजीत सिंह , काला सिंह आदि द्वारा बोई गई फसल को बिना विधिक प्रक्रिया के नष्ट करा दिया।



इतना ही नही पीड़ित मंजीत सिंह का आरोप है कि जब उसने फसल को नष्ट करने का विरोध किया तो हरजीत सिंह अपनी 12 बोर की लाइसेंसी बंदूक लेकर मंजीत सिंह पर फ़ायर करने के लिए उतारू हो गया , यह सब तहसीलदार शेरबहादुर सिंह और थाना अमरिया पुलिस बल के सामने होता रहा , लेकिन कानून की रक्षा का बोझ कंधों पर लेकर चलने बाले अधिकारी ही कानून का जनाजा निकालने पर डटे रहे। नामी-बेनामी जमीन जोतकर सरकार को चूना लगाने बाले हरजीत सिंह व दलवीर सिंह नाम के भू-माफियाओं को डीएम और एसडीएम सहित तहसीलदार की सरपरस्ती में सैकड़ों एकड़ और नामी-बेनामी जमीन पर अबैध कब्जा प्राप्त हो गया है। वहीं अगर बात नियम और कानून की करें तो जनपद में दर्जनों ऐसे पीड़ित किसान हैं जिनके पास जिला न्यायालय, कमिश्नरी, राजस्व परिषद और हाईकोर्ट के आदेश हैं और इन आदेशों का अनुपालन कराने की गुहार लगाते – लगाते पीड़ित किसान बूढ़े हो गए हैं, तहसील और कलेक्ट्रेट के चक्कर लगाते – लगाते उनके पाँव में छाले पड़ गए , आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है , लेकिन इन्हीं अधिकारियों द्वारा जिला न्यायालय, कमिश्नरी, राजस्व परिषद और हाईकोर्ट के आदेश को धता बताकर पीड़ितों को जमीनों पर कब्जे नहीं दिलाए गए। फिर सैकड़ों एकड़ जमीन पर से बर्षों का कब्जा हटाने के लिए कोई विधिक प्रक्रिया क्यों नही अपनाई गई ? काबिज किसानों की फसल को बिना किसी विधिक प्रक्रिया के कुछ ही घण्टों में नष्ट करके उनको आर्थिक क्षति कैसे पहुंचा दी गई? जमीन स्वामी विगत 18 बर्षों से कहाँ थे , और उन्हें अपनी जमीन की याद क्यों नही आई ? विदेशों में रह रहे लोगों की बेनामी सम्पत्ति को राज्य सरकार में निहित कराने के लिए लेखपाल या तहसीलदार द्वारा कार्यवाही शुरू क्यों नहीं की गई? हरजीत सिंह और दलवीर सिंह सहित अन्य फार्मर सीलिंग एक्ट से अधिक बेनामी सम्पत्तियों को जोत रहे हैं तो उनकी कुण्डली क्यों नहीं खंगाली गई? इसके अलावा तमाम ऐसे सवाल हैं जो कि राजस्व प्रशासन को कठघरे में खड़ा करते हैं। यही अधिकारी जीरो टॉलरेंस पर काम करने वाली सरकार के शासक योगी आदित्यनाथ के मंसूबों पर भी पानी फेरकर सरकार को कलंकित कर रहे हैं। ऐसे ही अधिकारियों के कारण उत्तर प्रदेश के शासन को जंगलराज और गुण्डाराज कहा जाने लगा है।


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