अली गढ़ ! गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर पं. हिमांशु पाराशर
गुरुचरण कमलेश देव नमः
गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर पंडित हिमांशु पाराशर ने बताया की आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा है गुरु पूर्णिमा में व्यास पूजन गुरुजी भजन आदि कार्य किए जाते हैं पूर्णिमा 4 जुलाई 2020 11:33 मिनट से लगेगी और 5 जुलाई 2020 10:13 तक रहेगी ऐसा मानते हैं ब्रज में गुरुपूर्णिमा का पर्व बडी श्रद्धा, भक्ति व उल्लास के साथ आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र में यह पर्व मुड़िया पूनौ नाम से प्रसिद्ध है। बंगाल के कृष्ण भक्त श्री रूप सनातन गोस्वामी जी गोवर्धन में रहते थे, उनके देहावसान पर उनके शिष्यों ने अपने सिरों का मुंडन कराकर (बाल कटाकर) गोवर्धन पर्वन की परिक्रमा लगायी, तभी से यह पर्व उनकी स्मृति में मनाया जाता है आज भी प्रति वर्ष उनके शिष्य उस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं।
व्यास पूर्णिमा:-
यह पर्व व्यास पूर्णिमा नाम से भी प्रसिद्ध है।महर्षि वेदव्यास ने वेद को चार भागों में विभाजित कर उसका अथर्ववेद, ऋग्वेद, यजुर्वेद, व सामवेद के रूप में विस्तार किया।इस लिए'व्यास पूर्णिमा नाम से प्रसिद्ध हैं।
गुरु पूर्णिमा:-
प्राचीन काल से ही गुरु का स्थान सर्वोच्च है। परब्रह्म की प्राप्ति कराने वाला गुरु ही हैं। गुरु की कृपा बिना मानव सद्मार्ग पर नहीं चल सकता है ।गुरु का शाब्दिक अर्थ (गु) अंधकार ,(रू)दूर करने वाला अर्थात अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला गुरु है एक शिक्षा गुरु होता है।और दूसरा दीक्षा गुरु होता है। शिक्षक शिक्षा गुरु है, मंत्र व कंठी देने वाला दीक्षा गुरु है। बिना गुरु ज्ञान के कोई उन्नति नहीं कर सकता। महर्षि दत्तात्रेय ने 24 गुरु बनाये। गुरु की महिमा अनंत है ।गुरु को साक्षारत् ब्रह्मा, विष्णु व शिव की संज्ञा दी है।
यथाः
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरूः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।।
अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्।
तत्पदं दशितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः।।
जगतपिता परमात्मा ही विश्व गुरु है।
कृष्णम् वन्दे जगद्गुरूम्।
भक्तिन, भक्त, भगवन्त गुरु, चतुर्नाम जपु एक।
इनके पद वन्दन किये नाशत विध्न अनेक।।