सीतापुर! कथा व्यास आशुतोष शास्त्री द्वारा विधार्थीयों के भोजन हेतु 21000रु की दी खाद्य .
मंडल लखनऊ/
जिला सीता पुर
कथा व्यास आशुतोष शास्त्री द्वारा विधार्थीयों के भोजन हेतु 21000रु की दी खाद्य सामग्री
नैमिष मिश्रिख सीतापुर कोरोना वैश्विक महामारी अथवा जानलेवा वायरस से मुक्ति हेतु दुर्लभ गुरु पुष्य योग में सदगुरुदेव श्री 1008 श्री श्री इन्दिरारमण रामानुजदास की प्रेरणा से नैमिषनाथ भगवान का विधानपूर्वक पूर्वक पूजन नैमिष के प्रख्यात कथावाचक आशुतोष पाण्डेय द्वारा किया गया।साथ ही साथ आश्रम के विद्यार्थियों के लिए 21000 रुपये की खाद्य सामग्री भी दान की गयी। आइये जानते है गुरुपुष्य योग के बारे मे आज के दिन दान करने से क्या फल मिलता है नरेश गुप्ता/ आनंद तिवारी की रिपोर्ट कथा व्यास आशुतोष शास्त्री द्वारा विधार्थीयों के भोजन हेतु 21000रु की दी खाद्य सामग्री
नैमिष मिश्रिख सीतापुर कोरोना वैश्विक महामारी अथवा जानलेवा वायरस से मुक्ति हेतु दुर्लभ गुरु पुष्य योग में सदगुरुदेव श्री 1008 श्री श्री इन्दिरारमण रामानुजदास की प्रेरणा से नैमिषनाथ भगवान का विधानपूर्वक पूर्वक पूजन नैमिष के प्रख्यात कथावाचक आशुतोष पाण्डेय द्वारा किया गया।साथ ही साथ आश्रम के विद्यार्थियों के लिए 21000 रुपये की खाद्य सामग्री भी दान की गयी। आइये जानते है गुरुपुष्य योग के बारे मे आज के दिन दान करने से क्या फल मिलता है गुरुपुष्य महायोग के दिन किए गए कार्यों का उत्तम फल प्राप्त होता है। यदि आप कोई वस्तु खरीदना चाहते हैं और फलदायी बनाना चाहते हैं तो उसे गुरुवार को खरीद लीजिए। गुरुवार को पुष्य नक्षत्र का योग हो तो गुरु-पुष्य नक्षत्र कहा जाता है। हिन्दू धर्म में व्रत, पर्व और त्योहार हैं और सबका अपना महत्व है। इन सभी पर्वों में मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। वैसे तो हर किसी शुभ कार्य के लिए अलग-अलग मुहूर्त होते हैं, लेकिन कुछ मुहूर्त हर कार्य के लिए विशेष होते हैं। इन्हीं में एक है, पुष्य नक्षत्र जिसे खरीदारी से लेकर अन्य शुभ कार्यों तक महामुहूर्त का स्थान प्राप्त है। जानिए पुष्य नक्षत्र का महत्व पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति देव माने गए हैं और शनि को इस नक्षत्र का दिशा प्रतिनिधि माना जाता है। चूंकि बृहस्पति शुभता, बुद्धिमत्ता और ज्ञान का प्रतीक हैं, तथा शनि स्थायित्व का, इसलिए इन दोनों का योग मिलकर पुष्य नक्षत्र को शुभ और चिर स्थायी बना देता है। पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों का राजा भी कहा जाता है। ऋगवेद में पुष्य नक्षत्र को मंगलकर्ता भी कहा गया है। इसके अलावा यह समृद्धिदायक, शुभ फल प्रदान करने वाला नक्षत्र माना गया है। पुष्य नक्षत्र को खरीदारी के लिए विशेष मुहूर्त माना जाता है, क्योंकि यह नक्षत्र स्थायी माना जाता है और इस मुहूर्त में खरीदी गई कोई भी वस्तु अधिक समय तक उपयोगी और अक्षय होती है। इस