जनपद शाहजहांपुर प्रधानमंत्री के सात वचनों को नहीं निभा रहा शाहजहांपुर
*जनपद शाहजहांपुर प्रधानमंत्री के सात वचनों को नहीं निभा रहा शाहजहांपुर*
प्रधानमंत्री के सात वचनों को नहीं निभा रहा शाहजहांपुर
14 अप्रैल को लाकडाउन टू की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इस दौरान उन्होंने आम जनता से सात वचन निभाने की अपील की थी। पर प्रधानमंत्री के सात वचनों को शाहजहांपुर वाले नहीं निभा रहे हैं। जो-जो बातें उन्होंने कोरोना वायरस को हारने के लिए कहीं, उन सभी का माखौल ही उड़ा कर रख दिया जा रहा है। लोग प्रधानमंत्री के सात वचनों को भूल ही गए हैं। सुबह से लेकर शाम तक सड़कों पर चहलपहल, बाजार में भीड़भाड़ को देख ही लगाया जा सकता है। बाकी के वचनों की कैसे धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कहने को लाक डाउन है, लेकिन मिल सबकुछ रहा है। दही-जलेबी भी बिक रही है। खस्ता कचौड़ी का भी स्वाद लिया जा रहा है। शराब की कालाबाजारी की जा रही है। सात सौ की बोतल इस वक्त डेढ़ हजार रुपए में बिक रही है। रंगाई पुताई का काम चल रहा है। बिल्डिंगें भी बन रही हैं। बालू का खनन भी हो रहा है। मशीनरी मार्केट भी खुल रही है। सदर का माल तक खुला पाया गया था। कापी किताबों की बिक्री हो रही है। कोई दुकान से बेच रहा है, कोई घर से बेच रहा है। बकरे का भी मीट बिक रहा है और मुर्गे का भी। गिनी चुनी औद्योगिक इकाइयां शुरू हो पाई हैं, इन इकाइयों के मालिकों ने बिना काम किए अप्रैल का वेतन कामगारों को दे पाने में असमर्थतता जताई है। औद्योगिक इकाइयों को बैंक से राहत की घोषणा सरकार ने की थी, लेकिन बैंक वाले सरकार के किसी आदेश को मानने को तैयार नहीं हैं। वह अपनी पूरी प्रक्रिया के तहत लोन की वसूली में लगे हैं। जिनके खाते में रुपए जमा है, उनके खाते से अपनी पूरी ईएमआई काटे ले रहे हैं। बिजली वाले उद्यमियों को छोड़ नहीं रहे हैं। पूरा सरचार्र्ज वसूला जा रहा है। कहने को सीमाएं सील हैं, लेकिन एक जिले से दूसरे जिले होकर वापस आ जाएंगे, बीच में रोकने वाला कोई नहीं है।
निभाने थे यह सात वचन
पहला वचन: घर के बुजुर्ग बीमार हैं, परिवार वाले तो उनकी देखभाल कर रहे हैं, लेकिन डाक्टर हाथ लगाने को तैयार नहीं हो रहे हैं। प्राइवेट डाक्टर पहले से ही घरों में बंद थे। मेडिकल कालेज के डाक्टर तो केवल मरीज को रेफर ही कर रहे हैं।
दूसरा वचन : सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए प्रधानमंत्री ने खासतौर पर कहा था, लेकिन शाहजहांपुर की सदर बाजार, बहादुरगंज मंडी, रोजा मंडी जाकर भी देख लीजिए, कैसे पालन हो रहा है दो गज दूरी का। सब एक दूसरे से गले तक लगे जा रहे हैं।
तीसरा वचन : कोरोना योद्धा तो अपने काम से ही भटक गए हैं, केवल सफाईकर्मी ही इस वक्त अपने काम मेंं जुटे हैं। बाकी पुलिस के पास केवल सम्मान कराने के सिवा कोई काम नहीं है, डाक्टरों की छवि भी अब भगवान जैसी टिक नहीं पा रही है।
चौथा वचन : सबसे ज्यादा तो नौकरीपेशा लोग हैं। वह इस वक्त तो घरों में हैं, लेकिन वह नौकरी पर बुलाए जाएंगे या नहीं, इसके बारे में वह संशय वाली स्थिति में हैं। ऐसा प्राइवेट सेक्टर में जॉब करने वालों के साथ ज्यादा है। स्पष्ट कुछ नहीं पता है।
पांचवां वचन : प्रधानमंत्री ने तो लोगों से अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए कहा था, लेकिन लोग शराब, गुटका और सिगरेट दोगुने से अधिक दाम पर खरीद रहे हैं। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए न तो लोग योगा कर रहे हैं, न ही पौष्टिक चीजें की खा रहे हैं।
छठा वचन : तीस लाख से अधिक आबादी वाले अपने शाहजहांपुर जिले के लोग आरोग्य सेतु मोबाइल एप डाउनलोड करने में फिसडडी साबित हो रहे हैं। अभी तक केवल एक ही लाख लोगों ने ही यह एप डाउनलोड किया है।
सातवां वचन : अभी एक सप्ताह से गरीबों, असहायों की मदद करने वालों की संख्या में भी बहुत ही गिरावट आई है। वरना लोगों में शुरू के 21 दिन तो राशन, बना हुआ भोजन बांटने की होड़ ही लगी हुई थी। फेसबुक पर यही फोटो दिखते थे।