एक ही शफ में खड़े हो गएमहमूदो आयाज।  ना कोई बंदा रहा,ना बंदा नवाज।          मोहम्मद अहमद तेली

एक ही शफ में खड़े हो गएमहमूदो आयाज। 
ना कोई बंदा रहा,ना बंदा नवाज।   
      मोहम्मद अहमद तेली
हाल ही में संपन्न हुए हरियाणा विधानसभा चुनावों के बाद सामने आने वाले चुनाव परिणामों ने दुश्मन और दोस्त दोनों को एक मंच पर ला खड़ा किया है। कहने का मतलब यह है कि कल के दुश्मन आज के दोस्त बन गए हैं। और एक दूसरे पर फब्तियां कसने के बजाय, एक दूसरे की बुराइयां करने की बजाय। एक दूसरे के गले में फूल मालाओं के हार पहना रहे हैं। इतना ही नहीं दोनों तरफ के लोग अपने-अपने आकाओं, नेताओं की इच्छाओं निर्देशों के अनुसार अपने पिछले इरादों, सोच को दरकिनार कर हरियाणा की जनता की खुशहाली और प्रदेश के विकास के लिए साझा कार्यक्रम, रूपरेखा बनाकर अगले 5 साल तक शासन चलाने के लिए रजामंद हो गए हैं॰
लिखने का मतलब यह है कि चोर लुटेरे साहूकार और पीड़ित सभी अपनी अपनी शिकायतों को भूलकर एक साथ एक लाइन में आकर खड़े हो गए हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए मुझे उर्दू के जाने-माने शायर की पंक्तियां एक ही शफ में खड़े हो गए महमूद ओआयाज ़़़़़़़़़
न कोई बंदा रहा ना कोई बंदा नवाज।



लिखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
चुनावी नतीजे आने के बाद दागी, धोखेबाज, असामाजिक तत्व, सांप्रदायिक उन्मादी, और विरोधी के साथ-साथ न जाने ऐसे और अनेकों जुमलों से नवाजे जाने वाले दोनों ही पार्टियों के राजनेता तथा राजनीतिक पार्टियां और इनके नवनियुक्तविधायको अब इनके अंदर गुण दोष नहीं खूबी आई खूबियां नजर आने लगी है।
       हरियाणा की खट्टर सरकार और केंद्र में सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी मेरा तो रात राष्ट्रीयता, समानता और भाईचारे के साथ-साथ विकासशील नेतृत्व के गुण अब इसकी सहयोगी जे,जे,पी,के नेतृत्व हो नजर आने लगे हैं। पहले इसे खट्टर सरकार मैं इसके नेताओं में केंद्र में बैठी भारतीय जनता पार्टी की सरकार में स्कोर कमियां ही कमियां नजर आती थी। और यह लोग पानी पी पीकर पीने कोसने में जुटे रहते थे। परंतु चुनावी नतीजे आने के बाद रातो रात भाजपा के अंदर आए चमत्कारी परिवर्तन ने इनको इनके साथ गठबंधन कर सरकार बनाने के लिए मजबूर कर दिया है। सहयोगी संगठन द्वारा लिए गए फैसले पर हरियाणा की जनता असमंजस की स्थिति में है। पशोपेश में है और उलझन का शिकार है। के रातों-रात इन्होंने दुश्मन को गले लगाने का फैसला क्यों और कैसे कर लिया। प्रदेश की जनता के दिलो-दिमाग में यह सवाल सब पैदा कर रहा है। जनता में अधिकांश लोगों का मत है कि गठबंधन का यह फैसला सत्ता की धमक, दौलत की खनक अथवा अपने बचाओ के लिए लिया गया फैसला है। प्रदेश के मतदाता बड़े स्तर पर जे,जे, पी के के जरिए लिए गए गठबंधन के फैसले से अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। क्योंकि बीजेपी के पक्ष में मतदान करने वाले मतदाताओं ने बीजेपी के खिलाफ और बीजेपी को हराने के लिए इसके पक्ष में मतदान किया था। न की भारतीय जनता पार्टी को दोबारा सत्ता में लाने के लिए। तो वहीं कुछ मतदाताओं का मानना है कि यह सरकार पूरे 5 साल नहीं चल पाएगी। अब देखना यह है कि गठबंधन की सरकार जनता की आकांक्षाओं उम्मीदों और विश्वास पर कहां तक खरा उतरने का प्रयास करने के साथ-साथ हरियाणवी को विकास की ओर ले जाने के लिए कितना प्रयास करती है।


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