ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री की मंदी से जूझ रहे है जिले के उद्यरग

जिले के 2500 उद्योग मंदी की चपेट


 जिले के यांत्रिकी उत्पादों में करीब 2500 छोटी-बड़ी ऐसी इंडस्ट्री हैं, जो ऑटो मोबाइल क्षेत्र में आई मंदी की चपेट में हैं। मंदी के चलते ऑटो पार्ट्स तैयार करने वाली इंडस्ट्री 400 करोड़ से ज्यादा के घाटे में हैं। इस दिवाली पर वाहनाें की बिक्री के आसार नहीं दिख रहे हैं, जिससे ऑटो सेक्टर से जुड़ी इंडस्ट्री कॉस्ट कटिंग पर आ गई हैं। इन कंपनियों में खर्चों में कटौती की जा रही है और बीच-बीच में शटडाउन की नौबत भी आ रही है। नौकरी छोड़कर जाने वाले कर्मचारियों और मजदूरों को भी कंपनी नहीं रोक रही हैं। उद्यमी जीएसटी में राहत मिलने के बाद केंद्र सरकार से कुछ और बड़े कदम उठाए जाने का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में जीएसटी काउंसिल की बैठक से भी उद्यमियों को उम्मीद है।
एक बड़ी इंडस्ट्री में हो चुका है शटडाउन :
मेरठ रोड स्थित एक बड़ी ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री में महीने की शुरुआत में तीन दिन का शटडाउन हो चुका है। इस कंपनी से वाहनों के पिस्टन, रिंग्स, इंजन पार्ट्स तैयार होकर सीेधे दुपहिया और चार पहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों को जाते हैं। देश भर में जिले की यह इंडस्ट्री ऑटो पार्ट्स में डील करती है। बताया जा रहा है कि ऑटा ेमोबाइल सेक्टर में मंदी से जिले की इस बड़ी इंडस्ट्री का प्रोडक्शन 20 से 40 प्रतिशत तक घटा है।
नाइट शिफ्ट बंद, कॉस्ट कटिंग शुरू :
मंदी की मार से ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री की कई यूनिट में नाइट शिफ्ट को बंद कर दिया गया है। ऑर्डर न मिलने से कॉस्ट कटिंग पर उद्यमी जोर दे रहे हैं। इसके लिए वेस्टेज कंट्रोल, रिजेक्शन कंट्रोल पर जो दिया जा रहा है। पार्ट्स तैयार करने के लिए रॉ मैटेरियल की बिक्री भी इंडस्ट्री ने 40 प्रतिशत तक घटा दी है।
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नौकरी पर अभी संकट नहीं :
ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री में अभी छंटनी का दौर शुरू नहीं हुआ है, लेकिन उद्यमियों का कहना है कि काम न होने पर कुछ कर्मचारी और मजदूर जो खुद दूसरी जगह काम मिलने पर जा रहे हैं, उनको रोका नहीं जा रहा है। इंडस्ट्री में अभी किसी को नौकरी से निकालने या बंदी का मामला सामने नहीं आया है।
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मंदी झेल रही इंडस्ट्रीज को बचाने के लिए केंद्र सरकार जल्द से जल्द कदम उठाए। वाहनाें की बिक्री पर ब्रेक लगे हैं, ऐसे में दिवाली के बाद तक मंदी के आसार दिख रहे हैं।
संजय चौधरी, उद्यमी
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ऑटो पार्ट्स पर भी जीएसटी को कम किया जाए। इसके अलावा ग्राहकों को उत्साहित करने वाले कदम सरकार उठाए तो मंदी से पार पाया जा सकता है। अभी किसी तरह की छंटनी इंडस्ट्री में नहीं है।
सुनील शर्मा, उद्यमी
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ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री करीब 400 करोड़ से अधिक के घाटे में है। वाहन निर्माता कंपनियां पूरी कोशिश कर रही हैं लेकिन इस बीच मंदी से बचने के उपायों पर काम किया जा रहा है।
नंदलाल, उद्यमी


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