कयामत आ जाती है कागजात और हेलमेट छूटने पर
छूट जाए अगर घर कागजात
मोहम्मद अहमद तेली
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अस्पताल दफ्तर कॉलेज नौकरी पर पहुंचने की जल्दी में इत्तेफाक से अगर कोई बाइक सवार कार सवार अपने ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी के जरूरी कागजात घर भूल जाता है तो मानिए कयामत आ जाती है भूचाल आ जाता है क्योंकि सड़क पर पेपर्स की चेकिंग करने वाला गार्ड सिपाही और दरोगा बेचारे ऐसे लोगों पर बुरी तरह बरसना शुरू हो जाता है। और जामा तलाशी लेने के साथ-साथ बदतमीजी गुंडई करने के अलावा न लिखने वाली गालियां बकते हुए उसके साथ पेश आता है। क्या हाल ही में हुए व्हीकल एक्ट के बदलाव में पुलिस को इन सभी बातों की छूट दे दी गई है? आजादी दे दी गई है? सड़क पर खुलेआम गुंडे की अब पुलिस को छूट दे दी गई है? अगर नहीं तो फिर क्यों पुलिस इतने शानदार ढंग से जनता के साथ पेश आ रही है। क्या पुलिस का गठन जनता के उत्पीड़न शोषण के वास्ते किया गया है? गुंडागर्दी को बढ़ावा देने के लिए किया गया है? इस सिलसिले में अगर सामान्य जनता के साथ-साथ राजनेताओं बुद्धिजीवियों साहित्यकारों पत्रकारों और साधारण जनता के विचार जाने जाएं तो सब का जवाब इसके खिलाफ ही होगा। इसका विरोध करेंगे। और साफ अल्फाजों में निंदा करते हुए कहेंगे कि इसका गठन जनसेवा और जनता की सुरक्षा के लिए किया गया है मगर यह रास्ते से भटक गई है, निर्धारित सिद्धांतों और आदर्शों का परित्याग कर यह नेताओं दलालों धनकुबेर ओके इशारे पर चलने लगी है, मान सम्मान घट गया है और इसके लिए खुद जिम्मेदार है ! इसलिए जनता इस को तिरस्कार भरी नजरों के साथ साथ नफरत के अंदाज से देखने लगी है जो इस के हित में नहीं है! देश की पुलिस से अपना खोया हुआ मान सम्मान और जनता का प्यार दोबारा पाने के लिए इसे अपने आचरण व्यवहार में बदलाव लाना होगा और इमानदारी के रास्ते पर चलते हुए राजनेताओं गुंडों दलालों से दूरी बनानी होगी। और अपने दायित्वों का निष्पक्षता निर्भरता और इमानदारी के साथ पालन करना होगा तभी देश की जनता के दिलों में यह दोबारा अपना खोया हुआ मुकाम हासिल कर सकती है अन्यथा नहीं।